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जमशेदपुर में आज भी जीवंत है लाल बहादुर शास्त्री की विरासत, पत्नी ललिता शास्त्री का झारखंड से खास जुड़ाव

Published: Fri, 02 Oct 2026 09:30 AM (IST)

लाल बहादुर शास्त्री की जमशेदपुर से जुड़ी यादें शहर के इतिहास में कई रूपों में दर्ज हैं, जिसमें एलबीएसएम कॉलेज ...और पढ़ें

एलबीएसएम कालेज का उद्घाटन सत्र में भाग लेने से पहले सर्किट हाउस में ललिता शास्त्री।

एलबीएसएम कालेज का उद्घाटन सत्र में भाग लेने से पहले सर्किट हाउस में ललिता शास्त्री।

HighLights

  1. भूदान आंदोलन से भी जुड़ी हैं स्मृति, गोपाल मैदान में संबोधन।

  2. करनडीह का एलबीएसएम कॉलेज उनकी विरासत का प्रमुख हिस्सा।

  3. शास्त्री जी ने 1965 में जमशेदपुर का दौरा किया था।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक देश के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का जमशेदपुर से जुड़ाव शहर के इतिहास में कई रूपों में दर्ज है। उनकी स्मृति, परिवार और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी विरासत आज भी यहां दिखाई देती है।

करनडीह स्थित लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल (एलबीएसएम) कालेज इस संबंध की प्रमुख कड़ी है। वर्ष 1971 में स्थापित यह संस्थान अब कोल्हान विश्वविद्यालय का अंग है। कालेज की आधारशिला शास्त्री जी की पत्नी ललिता शास्त्री ने रखी थी।

बाद में उनके पुत्र सुनील शास्त्री, जो टाटा स्टील में अधिकारी रहे, के प्रयासों से कालेज को नया भवन मिला। वर्ष 1976 में टाटा स्टील के तत्कालीन प्रबंध निदेशक रुसी मोदी ने भवन का उद्घाटन किया था। उस दौर में जमशेदपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के अवसर सीमित थे। ऐसे समय में स्थानीय शिक्षाविदों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संस्थान की स्थापना की।

इसका उद्देश्य विशेष रूप से सामाजिक व आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना था। आज यहां कला, विज्ञान और वाणिज्य समेत विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित हैं।

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1971 में एलबीएसएम कालेज के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंची ललिता शास्त्री। (फोटो: फाइल)

प्रधानमंत्री के रूप में आए थे जमशेदपुर

लालबहादुर शास्त्री 19 दिसंबर 1965 को प्रधानमंत्री के रूप में जमशेदपुर आए थे। उन्होंने टाटा स्टील के एक समारोह में हिस्सा लिया और विनोबा भावे के साथ जनसभा को संबोधित किया। 21 दिसंबर को बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में भी शास्त्री जी ने विनोबा भावे के साथ सभा की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद वह ताशकंद गए, जहां उनका निधन हो गया।

विनोबा भावे 19 दिसंबर 1965 को ग्रामदान आंदोलन के सिलसिले में जमशेदपुर पहुंचे थे। अगले दिन लाल बहादुर शास्त्री भी शहर आए। दोनों की बैठक तत्कालीन पत्थर स्कूल, वर्तमान जमशेदपुर वीमेंस कालेज में हुई थी। चाईबासा के रास्ते पहुंचे विनोबा भावे को अस्वस्थ होने पर बिष्टुपुर स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में ठहरना पड़ा।

स्वस्थ होने के बाद करीब साढ़े चार माह पश्चात वे ओडिशा रवाना हुए। गोपाल मैदान लाल बहादुर शास्त्री के साथ महात्मा गांधी की स्मृतियों से भी जुड़ा है। महात्मा गांधी ने 1934 में यूनाइटेड क्लब के अलावा गोपाल मैदान में सभा की थी।

इस तरह जमशेदपुर में लाल बहादुर शास्त्री की विरासत केवल एक शिक्षण संस्थान के नाम तक सीमित नहीं है। शहर के कई ऐतिहासिक स्थल उनकी यात्राओं और सार्वजनिक जीवन की यादों को आज भी संजोए हुए हैं। 

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