रांची/तुपुदाना, जेएनएन। रांची के खरसीदाग ओपी क्षेत्र के सोढा गांव निवासी प्रेम कच्छप की पत्थर से सिर कूचकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। मजदूर का शव गांव के समीप ही झाडिय़ों के पास मिला है। जानकारी के अनुसार सोढा गांव निवासी प्रेम कच्छप उम्र 40 वर्ष सोमवार को अपने घर से सब्जी लेने के लिए दस माइल बाजार गया था। बाजार से सब्जी लेकर देर रात तक अपने घर जब नहीं पहुंचा तो परिजनों ने अपने स्तर से खोजबीन शुरू की।

इसकी सूचना खरसीदाग ओपी को  दी गई। परिजनों ने मंगलवार से अपने सभी रिश्तेदारों के यहां प्रेम की तलाश कराई। लेकिन कहीं नहीं मिला। शुक्रवार की शाम 5:00 बजे के लगभग सोढा जाने वाले रास्ते के किनारे झाडिय़ों में एक शव देखा गया। प्रेम को पत्थर से कूचकर बेरहमी से हत्या कर शव को छिपाने के ख्याल से झाडिय़ों में फेंक दिया गया था। पत्थर से सिर, दोनों पैर, जांघ एवं छाती को कूचा गया था।

घटना की सूचना गांव वालों को मिली। गांव वालों ने खरसीदाग पुलिस को मामले की जानकारी दी। रात 8:30 बजे के लगभग पुलिस मौके पर पहुंची और शव को उठाकर ले गई। प्रेम हरदाग स्थित एक फैक्ट्री में मजदूरी करता था। परिवार में पत्नी सुनीता कच्छप, तीन बेटियां और एक बेटा प्रभु कच्छप है। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।

ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में इस क्षेत्र का थाना तुपुदाना ओपी था जिसे बाद में खरसीदाग ओपी में कर दिया गया। खरसीदाग पुलिस दिन में आती है और पत्थर बालू लदे वाहनों एवं पशु तस्करों से वसूली कर चली जाती है। इस क्षेत्र में किसी तरह के अपराध की घटना होने पर सूचना देने के बाद भी पुलिस काफी देर से पहुंचती है।

पूरी रात शव जंगल में पड़ा रहा 

शव मिलने की सूचना 5:00 बजे ग्रामीणों को मिली। ग्रामीणों ने 6:00 बजे खरसीदाग पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना पाकर करीब 9:00 बजे रात में खरसीदाग ओपी की पुलिस और तुपुदाना पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन पहुंचने के बाद भी शव को नहीं उठाया। गांव वाले भी देर रात तक शव के पास नहीं रहे। परिजनों के साथ अपने -अपने घर चले गए। सामान्य तौर पर पुलिस लावारिस शव को भी उठाकर थाना ले आती है। लेकिन पहचान होने के बाद भी पुलिस ने शव को थाना नहीं लाया। इससे ग्रामीण आक्रोशित हैं।

16 घंटे बाद पुलिस ने उठाया शव

सूचना मिलने के 16 घंटे के बाद सुबह 8:30 बजे शव को खरसीदाग ओपी पुलिस उठाकर थाना ले गई। रात भर शव लावारिस हाल में  रहा। लोगों का कहना था कि जंगली जानवर रात में शव को नुकसान पहुंचा सकते थे।

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