शक्ति सिंह, रांची : रिम्स में जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट की सेवा शुरू हो सकेगी। इससे किडनी के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना होगा। रिम्स में ही किडनी ट्रांसप्लांट हो सकेगा। रिम्स प्रबंधन ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सोमवार को किडनी ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर के लिए साक्षात्कार किया। यानि जल्द ही को-ऑर्डिनेटर की बहाली हो जाएगी। पहले से ही स्टेट आर्गन ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन की स्थापना की जा चुकी है ।

इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद रिम्स ट्रांसप्लांट करने के लिए एक विशेष टीम तैयार कर उसे प्रशिक्षण के लिए किसी अच्छे संस्थान में बाहर भेजा जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद एक अनुभवी विशेषज्ञ के नेतृत्व में कुछ दिनों तक रिम्स के ही नेफ्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और एनेस्थेटिक सहित अन्य टीम ट्रांसप्लांट करेगी । किडनी ट्रांसप्लांट शुरू होने से पहले एक टीम रिम्स की व्यवस्था का जायजा भी लेगी। यह टीम किडनी ट्रांसप्लांट के मानकों को लेकर मौजूदा सुविधा और व्यवस्था की समीक्षा करेगी। एक साल पहले ही स्टेट आर्गन ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन की स्थापना की जा चुकी है। और पहले से ही रिम्स में नेफ्रोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो चुकी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले 7 से 8 महीने में किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर सर्जरी भी शुरू हो सकती है।

डायलिसिस सेंटर बनने का रास्ता साफ : रिम्स में सारी सुविधाएं उपलब्ध होने से ट्रांसप्लांट के लिए लंबी प्रक्रिया छुटकारा मिल सकेगा। वहीं सेंटर की अनुमति से किडनी ट्रांसप्लांट भी किया जा सकेगा। नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट शुरू होने से डायलेसिस सेंटर बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके तहत डायलेसिस की एक सेपरेट यूनिट होगी। जहां पर एक्सपर्ट टेक्नीशियन तैनात किए जाएंगे, जिससे कि मरीजों की रेगुलर डायलेसिस की जा सकेगी। वर्तमान में कुछ बेड की सुविधा मिली है। ऐसे में इलाज में होने वाले खर्च के बोझ से भी लोग बच जाएंगे। बता दें कि झारखंड में किडनी के मरीजों की संख्या काफी है।

रिम्स के यूरोलाजी विभाग में लेजर मशीन से पथरी और प्रोस्टेट की होगी सर्जरी : रिम्स में अब लेजर लिथोट्रिप्सी मशीन की सुविधा होगी। इसमें दूरबीन विधि से शरीर के किसी भी अंग में जमा हुए स्टोन को तोड़कर बालू के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। यूरोलाजी विभाग में इसकी व्यवस्था जल्द की जाएगी। इस मशीन की खरीदारी को लेकर प्रबंधन की स्वीकृति भी मिल चुकी है। इस मशीन से स्टोन को हटाने के अतिरिक्त प्रोस्टेट ग्लैैंड, पेशाब में रुकावट, पेशाब के रास्ते का ट््यूमर आदि का भी आपरेशन हो सकेगा। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह वरदान के समान होगा। निजी अस्पतालों में इसी सर्जरी के लिए मरीजों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। रिम्स में इस विधि से सर्जरी निश्शुल्क होगी। 

कैसी है ये विधि

  • इस मशीन से शरीर के किसी भी हिस्से की पथरी को तोड़कर चूर्ण बनाया जा सकता है। शरीर के स्टोन, प्रोस्टेट ग्रंथि के इलाज की यह आधुनिकतम विधि है।
  • लिथोट्रिप्सी में स्टोन को तोडऩे में इंडोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है।
  • इंडोस्कोप एक लचीला ट्यूब होता है जिसमें लाइट और कैमरा जुड़ा होता है। इसकी सहायता से डाक्टर कैविटी या आर्गन के अंदर देख पाता है।
  • यूरेट्रोस्कोप के जरिए डाक्टर स्टोन को देख पाता है। इसके बाद लेजर के प्रयोग से इसे तोड़ा जाता है। इस विधि से सर्जरी होने से मरीज जल्दी रिकवर होता है।
  • लेजर से पूरी प्रक्रिया होने के कारण रक्तस्राव नहीं होता। इस विधि से प्रोस्टेट ग्रंथि का भी आपरेशन किया जा सकता है। प्रोस्टेट ग्रंथि के लिए अब यह आधुनिकतम इलाज है।

Edited By: Sanjay Kumar Sinha