50 हजार के कर्ज से शुरू की खेती, अब 40 किसानों के खेतों में लहलहा रही स्ट्रॉबेरी; पलामू की कंचन बनीं मिसाल
कंचन देवी ने 50 हजार के ऋण से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की, जो अब मनातू प्रखंड के 40 किसानों ...और पढ़ें

झारखंड में स्ट्रॉबेरी की खेती से बदली किसानों की तकदीर, कंचन देवी बनीं प्रेरणा।
HighLights
कंचन देवी ने 50 हजार से स्ट्रॉबेरी खेती की शुरुआत की।
तीन साल में 18 लाख का टर्नओवर, 40 किसान जुड़े।
मनातू की पांच पंचायतों तक फैला स्ट्रॉबेरी का दायरा।
चंदन कुमार राय, तरहसी (पलामू)। इरादे मजबूत हों तो छोटी पूंजी भी बड़े बदलाव की बुनियाद बन सकती है। इसकी मिसाल मनातू प्रखंड में देखने को मिल रही है। यहां तीन साल पहले महज 50 हजार रुपये के ऋण से शुरू हुई स्ट्रॉबेरी की खेती अब किसानों के लिए आमदनी का नया जरिया बन गई है।
नौडीहा पंचायत के तीलो गांव की कंचन देवी ने इसकी शुरुआत की थी। आज उनकी पहल से प्रेरित होकर करीब 40 किसान इस खेती से जुड़ चुके हैं। कभी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान अब स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसल के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
कंचन देवी ने पलाश (जेएसएलपीएस) से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर एक एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की थी। पहले ही वर्ष पांच लाख और तीसरे साल 18 रुपये का टर्नओवर हासिल होने से उनका उत्साह बढ़ा। उनकी सफलता ने गांव की दूसरी महिलाओं को भी इस खेती के लिए प्रेरित किया। देखते ही देखते यह पहल एक महिला से निकलकर कई गांवों तक पहुंच गई।
वर्तमान में मनातू प्रखंड की सात पंचायतों में से पांच पंचायतों में किसान दीदियां स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं। भीतरी गांव की रीना देवी और सुमित्रा देवी समेत कई महिलाएं इस मुहिम का हिस्सा बनी हैं। स्ट्रॉबेरी की खेती ने ग्रामीण महिलाओं के सामने स्वरोजगार और बेहतर आमदनी का नया रास्ता खोला है।
सीमित पूंजी से शुरू होने वाली इस खेती में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही है। अब वे पारंपरिक खेती के साथ ऐसी फसलों को अपना रही हैं, जिनसे कम जमीन में बेहतर आमदनी की संभावना है।
एक की पहल बनी 40 किसानों की प्रेरणा
मनातू में स्ट्रॉबेरी की खेती का दायरा हर साल बढ़ रहा है। कंचन देवी की सफलता के बाद आसपास की महिलाओं ने भी इस खेती में रुचि दिखाई। वर्तमान में करीब 40 किसान इससे जुड़ चुके हैं। जेएसलएलपीएस की मनातू बीपीएम नम्रता ने बताया कि इस वर्ष 18 नए किसानों को भी स्ट्रॉबेरी की खेती से जोड़ने की पहल की गई है।
इस तरह सात पंचायतों में से पांच पंचायतों तक इसका विस्तार हो चुका है। उद्यान विभाग और जेएसएलपीएस के समन्वय से किसानों को नकदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
किसानों को आर्थिक सहायता और मुफ्त स्ट्रॉबेरी के पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और उनकी आमदनी में वृद्धि करना है।
बाजार मिला तो मनातू की स्ट्रॉबेरी बनेगी नई पहचान
स्ट्रॉबेरी की खेती से मनातू के किसानों को नई उम्मीद मिली है, लेकिन इस सफलता को स्थायी बनाने के लिए बेहतर बाजार की उपलब्धता जरूरी है। स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब होने वाली फसल है। ऐसे में इसके भंडारण, परिवहन और उचित मूल्य पर बिक्री की व्यवस्था किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
यदि किसानों को बाजार और विपणन की बेहतर सुविधा मिले तो इस खेती का दायरा और बढ़ सकता है। इससे न केवल किसान दीदियों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि मनातू की पहचान भी स्ट्रॉबेरी उत्पादक क्षेत्र के रूप में स्थापित हो सकती है।
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