JSSC CGL पेपर लीक मामला: साले और ससुर के खाते में 19 लाख मिलने पर फंसा आरोपी, CID ने कोर्ट में रखी केस डायरी
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL पेपर लीक मामले में CID ने कोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। आरोपी दीपक ...और पढ़ें

बोकारो का दुग्धा ही वह मुख्य ठिकाना था, जहां परीक्षा से पूर्व अभ्यर्थियों को एकत्र कर प्रश्न और उत्तर रटवाए गए थे।
HighLights
CID ने JSSC CGL पेपर लीक मामले में कोर्ट में खुलासा किया।
आरोपी दीपक कुमार ने खुद और अन्य अभ्यर्थियों को पास कराया।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL)-2023 में धांधली और पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीआईडी (CID) ने कोर्ट में बड़ा खुलासा किया है।
सीआईडी ने मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल धनबाद निवासी सफल अभ्यर्थी दीपक कुमार की जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए अदालत में जांच रिपोर्ट और सबूत पेश किए हैं।
खुद पास हुआ, साले व अन्य अभ्यर्थियों की भी कराई सेटिंग
सीआईडी ने अदालत को अवगत कराया कि आरोपी दीपक कुमार ने न केवल पैसे देकर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर अपनी सेटिंग कराई, बल्कि अपने साले उमेश कुमार राय और अन्य कई अभ्यर्थियों को भी अनुचित साधनों के जरिए परीक्षा पास कराई।
दीपक को उसके साले उमेश कुमार राय तथा दो अन्य सफल अभ्यर्थियों (आनंद कुमार सिंह व विजय कुमार तिवारी) के साथ 28 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
सेटिंग के बाद खाते में जमा हुए 19 लाख रुपये
सीआईडी की छानबीन में सामने आया है कि परीक्षा में सेटिंग से चयन के बाद 22 जनवरी 2026 को दीपक के ससुर सुरेश राय के बैंक खाते में 14 लाख रुपये और साले उमेश राय के खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
सीआईडी इसे सिंडिकेट द्वारा परीक्षा सेटिंग के एवज में मिली राशि का हिस्सा मान रही है। सीआईडी थाने में दर्ज मामले की जांच के दौरान दीपक के मोबाइल सीडीआर (CDR) विश्लेषण से कई अन्य अभ्यर्थियों से उसके संपर्क में होने और अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक ले जाने वाले वाहनों की पुष्टि हुई है।
बोकारो के दुग्धा में रटवाए गए थे प्रश्न-उत्तर
जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार साला उमेश कुमार राय मूल रूप से बिहार के भोजपुर का रहने वाला है और वर्तमान में बोकारो के दुग्धा स्थित बीसीसीएल कॉलोनी में रहता है।
बोकारो का दुग्धा ही वह मुख्य ठिकाना था, जहां परीक्षा से पूर्व अभ्यर्थियों को एकत्र कर प्रश्न और उत्तर रटवाए गए थे। परीक्षा संचालन एजेंसी 'आइसीएन' के संचालक मिथिलेश सिंह ने अपने कर्मियों और रिश्तेदारों की मदद से प्रश्न पत्र लीक कराया था।
केस डायरी में शिकायतकर्ता कोचिंग संचालक राजेश प्रसाद के बयान का भी उल्लेख है, जिन्होंने धनबाद के बलियापुर स्थित केंद्र पर परीक्षा से पहले ही मोबाइल पर पेपर लीक होने की बात कही थी।
