JSSC CGL पेपर लीक मामले में CID ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सहायक प्रशाखा पदाधिकारी सहित दो को किया गिरफ्तार
जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले में सीआईडी ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सहायक प्रशाखा पदाधिकारी भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है।

जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक में दो और आरोपी गिरफ्तार।
HighLights
जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक में दो और आरोपी गिरफ्तार।
उच्च शिक्षा विभाग के सहायक प्रशाखा पदाधिकारी भी गिरफ्तार।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) प्रतियोगिता परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीआईडी ने शुक्रवार को दो अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा है।
गिरफ्तार आरोपितों में रांची के बरियातू थाना क्षेत्र के टैगोर हिल रोड रविंद्र नगर निवासी भानु प्रताप व रांची के ही हटिया के टोंको रोड, केशव विहार सिंह मेंशन निवासी सुमित कुमार सिंह शामिल हैं। भानु प्रताप जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सफल अभ्यर्थी है और वर्तमान में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (एएसओ) के पद पर कार्यरत था।
वहीं, सुमित कुमार सिंह किराना व फोटो कापी आदि की दुकान चलाता था। गिरफ्तार दोनों ही आरोपित अप्राथमिकी आरोपित हैं। सीआईडी ने इन्हें एक जनवरी 2025 को सीआइडी थाना में दर्ज कांड संख्या 01/2025 में गिरफ्तार किया है।
परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह के रिश्तेदार हैं दोनों
गिरफ्तार दोनों ही आरोपित जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स आईसीएन टेक्नोलॉजी के संचालक मिथिलेश सिंह के रिश्तेदार हैं। मिथिलेश सिंह वर्तमान में फरार है। इससे पूर्व सीआईडी ने मिथिलेश सिंह के एक अन्य रिश्तेदार रितेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वह मूल रूप से बिहार के भोजपुर का रहने वाला था और वर्तमान में बोकारो के दुग्धा में रहता था।
10-12 अभ्यर्थियों को नकल कराकर पास कराने के आरोप हुए हैं साबित
सीआईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपित भानु प्रताप व सुमित कुमार सिंह ने 10-12 अभ्यर्थियों को नकल कराकर जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा पास करवाया था। भानु प्रताप भी स्वयं पास किया था और अन्य अभ्यर्थियों को भी पास करवाया था।
सीआईडी ने पूर्व में भी ऐसे दो दर्जन से अधिक एजेंट्स, दलालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, जिनपर प्रश्न पत्र लीक करने, उसे रटवाने से लेकर नकल कराने तक के आरोप हैं। करोड़ों रुपये में सीटें बेचीं गईं और अयोग्य अभ्यर्थियों को भी परीक्षा में सफल कराया गया था। परीक्षा पास करने के बाद नौकरी कर रहे ऐसे कई अभ्यर्थी भी वर्तमान में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं।