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'35-40 लाख देकर नहीं, मेहनत से पाई है नौकरी', JSSC CGL से नियुक्त कर्मियों का छलका दर्द

Published: Sat, 12 Sep 2026 08:56 PM (IST)

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता (सीजीएल) परीक्षा से नियुक्त कर्मियों ने 35-40 लाख रुपये देकर नौकरी पाने के आरोपों को खारिज किया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. नियुक्त कर्मियों ने 35-40 लाख रुपये देकर नौकरी पाने का खंडन किया।

  2. कहा, नौकरी वर्षों की मेहनत और लगन का परिणाम है।

  3. निष्पक्ष जांच की मांग की, पूरी परीक्षा रद करने का विरोध किया।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता (सीजीएल) परीक्षा से नियुक्त कर्मियों ने सीआईडी जांच में सामने आ रही गड़बड़ियों, सरकार की कार्रवाई तथा इंटरनेट मीडिया पर हो रही बदनामी पर शनिवार को अपना दर्द बयां किया।

कर्मियों ने रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यह गलत है कि उनकी नियुक्ति 35-40 लाख रुपये देकर हुई है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें वर्षों की मेहनत और लगन से यह नौकरी मिली है।

कर्मियों का दर्द इस बात को लेकर भी था कि उनकी नियुक्ति को लेकर इंटरनेट मीडिया पर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं, जिससे उनकी छवि खराब हो रही है। उन्हें अब शक की नजर से देखा जाने लगा है। परिवार भी परेशान है। वे मानसिक और सामाजिक परेशानी से जूझ रहे हैं।

सीजीएल परीक्षा के माध्यम से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों व कार्यालयों में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी व अन्य पदों पर नियुक्त कर्मियों ने कहा कि उन्हें सीबीआई या अन्य जांच से परहेज नहीं है, लेकिन जांच निष्पक्ष हो जांच में वे दोषी पाए जाते हैं तो उनपर कार्रवाई हो।

कोई भी निर्णय भीड़ के दबाव में न हो। केवल भीड़ के दबाव में पूरी परीक्षा रद करना उचित नहीं है। नियुक्त कर्मियों दे दावा किया कि सीजीएल परीक्षा के माध्यम से 500 से अधिक आदिवासी छात्रों का चयन हुआ है।

अधिसंख्य झारखंड के निवासी हैं। कई ऐसे हैं जो दूसरी नौकरी छोड़कर इसमें नियुक्त हुए। कई कर्मी ऐसे हैं जो दोबारा परीक्षा की तैयारी का जोखिम नहीं ले सकते हैं। सफल अभ्यर्थियों में से एक जावेद ने दावा किया कि कई छात्रों ने वर्षों की मेहनत के बाद सफलता पाई है। लेकिन, अब उनपर पैसे की बदौलत नौकरी हासिल करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

एक सफल अभ्यर्थी ने कहा कि 10 वर्षों के बाद सरकार की ओर से इस परीक्षा का सफल आयोजन किया गया है। अब अगर मामला लटका तो परेशानी बढ़ जाएगी। सफल अभ्यर्थियों ने कहा कि वे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। 35 से 40 लाख रुपये देकर नौकरी कैसे ले सकते हैं? अभ्यर्थियों ने कहा कि मामले की जांच सीआईडी कर रही है और कोर्ट में भी मामला चल रहा है।

ऐसे में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। बताते चलें कि राज्य सरकार के आदेश पर सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी की दोबारा सीआईडी जांच चल रही है।

अबतक की जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि भी हुई है। इधर, राज्य सरकार ने इस परीक्षा को रद कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी। सभी कर्मियों को वापस काम पर भी रख लिया गया है।

'आईटीबीपी की नौकरी छोड़कर आए'

प्रेस वार्ता के दौरान कुछ अभ्यर्थी भावुक भी हो गए। एक अभ्यर्थी अनिल रजक ने कहा कि वह आदिवासी और गरीब परिवार से आते हैं और उनकी मां घर पर रहती हैं। ऐसे में 35-40 लाख रुपये देकर नौकरी हासिल करना उनके लिए संभव नहीं है।

एक कर्मी चंद्रो हैबरू ने कहा कि सीजीएल में चयन के बाद उन्होंने आईटीबीपी की नौकरी छोड़ दी थी। अब यदि यह नौकरी भी चली जाती है तो उनके सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

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