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 बिहार में पेपर लीक पर आंदोलन, झारखंड में जेपीएससी परीक्षा घोटाले पर राजद-वाम दल चुप 

Published: Mon, 03 Aug 2026 07:00 AM (IST)

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर कई राजनीतिक दल दूरी बनाए ...और पढ़ें

बाबूलाल मरांडी और हेमंत सोरेन। फाइल फोटो

बाबूलाल मरांडी और हेमंत सोरेन। फाइल फोटो

HighLights

  1. जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ियों का विवाद।

  2. भाजपा-आजसू सरकार पर हमलावर, युवा मोर्चा कर रहा प्रदर्शन।

  3. सत्ताधारी गठबंधन व कई दल विवादों से बनाए हुए दूरी।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ियों से संबंधित विवादों से कई राजनीतिक दल दूरी बनाए हुए हैं।

इस मुद्दे पर विपक्ष के रूप में भाजपा जहां सरकार पर लगातार हमलावर है, तो उसकी सहयोगी पार्टी आजसू भी बीच-बीच में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है।

दोनों दलों के युवा मोर्चा के कार्यकर्ता लगातार इस मामले को उठाते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि एनडीए के ही सहयोगी दल जदयू और लोजपा (आर) की ओर से इस तरह का कोई प्रयास नहीं हुआ है।

सत्तारूढ़ गठबंधन की शांति 

दूसरी तरफ, बिहार में नीट पेपर लीक पर आंदोलन करने वाले राजद और वाम दल झारखंड में जेपीएससी नियुक्ति घोटाले पर चुप है।

सत्तारूढ़ गठबंधन दलाें की बात करें तो नीट पेपर लीक पर दिल्ली से लेकर झारखंड तक आंदोलन करने वाली कांग्रेस ने जेपीएससी में गड़बड़ियों के सभी मामले को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर छोड़ दिया है।

उसका कहना है कि जब इस मामले को मुख्यमंत्री स्वयं देख रहे हैं तो इसपर मुखर होने का सवाल ही कहां है। पार्टी ने खुद को भाजपा द्वारा इस मुद्दे पर लगाए जा रहे आरोपों को जवाब देने पर ही केंद्रित कर रखा है।

भाजपा का धरना-प्रदर्शन हो या उसके किसी बड़े नेता का बयान, पार्टी की ओर से किसी न किसी नेता को उनका जवाब देने के लिए लगाया जाता है।

इससे इतर, झामुमो भाजपा के आरोपों पर किसी तरह का पलटवार करने से बचते हुए यह बता रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सख्त निर्देश पर ही जेपीएससी नियुक्ति घोटाले की जांच हो रही है और भ्रष्टाचार के ऐसे मामले पर पार्टी जीरो टोलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

गठबंधन के साथियों खुद को रखा अलग

वहीं, राजद और वाम दलों ने पूरी तरह इन विवादों से अपने को अलग रखा है। इनकी ओर से न तो भाजपा के आरोपों पर पलटवार करने की नीति अपनाई जा रही है और न ही इस मुद्दे पर सरकार से किसी तरह के संवाद का प्रयास किया है।

विधानसभा में पहली बार उपस्थिति दर्ज करानेवाले जेएलकेएम के नेता जयराम महतो भी इस मुद्दे पर चुप ही हैं। हालांकि उनके दल के ही देवेंद्र नाथ महतो अकेले युवाओं के साथ आंदोलन कर रहे हैं।

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