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JPSC Scam: OMR शीट की मूल प्रति से मिलान करेगी CID, गड़बड़ी मिलने पर फॉरेंसिक जांच

Published: Wed, 02 Sep 2026 08:00 AM (IST)

झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के मेधा घोटाले की जांच कर रही सीआईडी ने अभ्यर्थियों से ओएमआर शीट मंगाई है, जिसमें 1000 शीट प्राप्त हुई हैं।

तीन दिनों के भीतर ही 1000 सफल अभ्यर्थियों ने अपनी ओएमआर शीट सीआईडी को उपलब्ध करा दी है।

तीन दिनों के भीतर ही 1000 सफल अभ्यर्थियों ने अपनी ओएमआर शीट सीआईडी को उपलब्ध करा दी है।

HighLights

  1. सीआईडी ने 1000 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट प्राप्त की।

  2. ओएमआर शीट की मूल प्रति से होगी जांच, फॉरेंसिक भी।

  3. पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते से फिर पूछताछ।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में हुए बहुचर्चित मेधा घोटाले की जांच कर रही सीआईडी (CID) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। 
 
जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सीआईडी ने 29 जुलाई को एक सार्वजनिक सूचना जारी कर प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी 2204 अभ्यर्थियों से सहयोग मांगा था।
 
सीआईडी ने अभ्यर्थियों को 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर (OMR) शीट की कार्बन कॉपी की पीडीएफ या फोटो खींचकर आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर (9934309058) या ईमेल आईडी पर भेजने का निर्देश दिया था।
 

3 दिनों में 1000 अभ्यर्थियों ने भेजी OMR शीट

निर्धारित अवधि के तहत 30 जुलाई से 1 अगस्त यानी शुरुआती तीन दिनों के भीतर ही 1000 सफल अभ्यर्थियों ने अपनी ओएमआर शीट सीआईडी को उपलब्ध करा दी है। दस्तावेज़ जमा करने के लिए अभी चार दिन शेष हैं।

सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, प्राप्त सभी ओएमआर शीट की प्रतियां मूल प्रति से मिलाई जाएंगी। यदि किसी शीट में विसंगति या हेराफेरी का संदेह होता है, तो उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। 
 
सीआईडी ने स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी अपनी ओएमआर शीट जमा नहीं करेंगे, वे संदेह के घेरे में आएंगे और उन्हें समन भेजकर व्यक्तिगत पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
 
राज्य सरकार के आदेश पर सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर इस घोटाले की जांच की जा रही है। इसमें डेटा टेम्परिंग, ओएमआर शीट में हेराफेरी, अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने और वित्तीय लेनदेन के गंभीर आरोप हैं।
 

रिमांड पूरी होने के बाद 3 और आरोपी भेजे गए जेल

सीआईडी ने शनिवार को रिमांड अवधि समाप्त होने पर परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी मेसर्स TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के तीन कर्मियों हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया। 
 
इन तीनों से पांच दिनों तक गहन पूछताछ की गई। जेल भेजने से एक दिन पहले इन्हें जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष सह सेवानिवृत्त आईएएस एल. खियांग्ते के सामने बैठाकर आमने-सामने पूछताछ भी कराई गई थी।
 

प्रकरण में अब तक इन 11 आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी

  •     श्वेता कुमारी गुप्ता - उप परीक्षा नियंत्रक, JPSC
  •     रामवीर सिंह - निदेशक, मेसर्स TSR डेटा प्रोसेसिंग प्रा. लि. (TDPL)
  •     मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी - मार्केटिंग मैनेजर व मुख्य आरोपी, TDPL
  •     उस्मान - तकनीकी प्रोग्रामर, TDPL
  •     एबाद - तकनीकी प्रोग्रामर, TDPL
  •     हेमंत वर्मा - कर्मी, TDPL
  •     प्रदीप कुमार सिंह - कर्मी, TDPL
  •     संजय कुमार - कर्मी, TDPL
  •     सोनू कुमार - कर्मचारी, JPSC
  •     अरविंद कुमार - मुख्य आरोपी मनोज तिवारी का सहयोगी
  •     सुमन सौरभ - 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थी


सोमवार को पूर्व अध्यक्ष फिर से बुलाया

मामले में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष सह झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। सीआईडी ने उन्हें समन जारी कर 3 अगस्त को पुनः पूछताछ के लिए बुलाया है। 
 
यह लगातार चौथा दिन होगा, जब सीआईडी मुख्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और परीक्षा मामलों के विशेषज्ञ उनसे ओएमआर शीट हेराफेरी व प्रशासनिक लापरवाही को लेकर तीखे सवाल करेंगे।

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