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JPSC-JSSC घोटाला: खुद दारोगा नहीं बन सका रामबीर, लेकिन जेपीएससी में सेंधमारी कर बांट दीं अवैध नौकरियां

Published: Fri, 11 Sep 2026 09:29 PM (GMT+05:30)

सीआईडी ने जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा अनियमितताओं के मामलों में गिरफ्तार आरोपियों की पूरी जानकारी विशेष अदालत में जमा की है।

यूपी में दारोगा नहीं बन पाया तो टीडीपीएल नाम से रामबीर सिंह ने बना ली थी परीक्षा संचालन एजेंसी

यूपी में दारोगा नहीं बन पाया तो टीडीपीएल नाम से रामबीर सिंह ने बना ली थी परीक्षा संचालन एजेंसी

HighLights

  1. सीआईडी ने जेपीएससी अनियमितता के आरोपियों की जानकारी कोर्ट को दी।

  2. टीडीपीएल निदेशक रामबीर सिंह ने यूपी दारोगा बनने का प्रयास किया था।

  3. श्वेता गुप्ता ने जेपीएससी उप परीक्षा नियंत्रक रहते हुए परिणाम जारी किए।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) व झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेराफेरी व सीट बेचने, सेटिंग करने के मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपितों के बारे में सीआईडी ने विशेष अदालत में पूरी जानकारी जमा की है।

आरोपितों का पारिवारिक व आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी सीआईडी ने कोर्ट को दी है। जेपीएससी की परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के संचालक रामबीर सिंह के बारे में सीआईडी को जानकारी मिली है कि उसने वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश में दारोगा बहाली में प्रारंभिक परीक्षा तो पास की थी, लेकिन अंतिम रूप से वह सफल नहीं हो सका।

जब कोई नौकरी नहीं लगी तो उसने वर्ष 2010 में टीडीपीएल नाम से अपनी एजेंसी बनाई थी। इसमें उसके अलावा तारिक व सत्यपाल सिंह भी निदेशक थे। यह एजेंसी शेयर मार्केटिंग, चुनाव का दिशा-निर्देश, टेंडर व आधार कार्ड आदि से संबंधित काम करती थी। वर्ष 2013 में तारिक ने इस्तीफा दिया था।

वर्ष 2022-23 में दिल्ली में मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी लालू प्रसाद से मुलाकात हुई थी। लालू प्रसाद (अब मृत) ने ही मास्टरमाइंड अभय तिवारी से रामबीर की मुलाकात कराई थी। अभय तिवारी की मदद से ही टीडीपीएल को वर्ष 2023 में जेपीएससी में प्रवेश मिला था।

वर्ष 2009 में स्नातक पास किया था उस्मान

दूसरे आरोपित उस्मान ने वर्ष 2009 में स्नातक पास किया था। वर्ष 2010 से वर्ष 2016 तक वह मेगा साफ्ट इंफार्मेशन सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड में वह तकनीकी सपोर्ट इंजीनियर के रूप में काम किया। वर्ष 2017 में वह अपने सहयोगी हेमंत कुमार वर्मा के सहयोग से पीकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी बनाया।

इस कंपनी का मुख्य कार्यालय लखनऊ में था। यह कंपनी बैंकिंग क्षेत्र में साफ्टवेयर उपलब्ध कराती थी। हेमंत वर्मा के सहयोग से ही वर्ष 2020 में उसकी मुलाकात टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह से हुई थी। रामबीर सिंह ने उसे उत्तर प्रदेश विधानसभा में आरओ व एआरओ परीक्षा के आवेदन फार्म व प्रवेश पत्र जेनरेशन का काम दिया था।

इसके बाद टीडीपीएल से उसका संपर्क खत्म हुआ। वर्ष 2025 में रामबीर सिंह ने उसे फिर बुलाया और यूपी की तरह झारखंड में भी जेपीएससी का पोर्टल बनवाया था और रुपये लेकर अवैध नौकरियां बांटी।

वर्ष 2010 में डिप्टी कलेक्टर बनी थी श्वेता गुप्ता

जेपीएससी मेधा घोटाला में गिरफ्तार जेपीएससी की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता वर्ष 2010 में तीसरी जेपीएससी में चयनित हुई थी। उसकी पहली पोस्टिंग रामगढ़ बीडीओ के पद पर हुई थी।

इसके बाद वह इटकी बीडीओ, कार्यपालक दंडाधिकारी रांची, सहायक निदेशक महिला बाल विकास एवं सामजिक सुरक्षा विभाग, अवर सचिव राजभवन व फिर जेपीएससी में योगदान दी।

वर्ष 2024 में जेपीएससी में उप परीक्षा नियंत्रक बनी। यहां से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में उप सचिव बनीं और वहां से फिर तबादला जेपीएससी में हो गया। जेपीएससी में उप परीक्षा नियंत्रक रहने के बावजूद नियंत्रक के अवकाश पर जाने पर पूरा कार्य श्वेता गुप्ता ने किया।

इन्हीं के कार्यकाल में जेपीएससी की 11वीं व 13वीं का साक्षात्कार हुआ था। जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आदेश पर श्वेता गुप्ता ने ही परीक्षा परिणाम जारी किया था। पूर्व में भी जांच में ये सभी तथ्य आ चुके हैं।

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