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उत्तर प्रदेश की तर्ज पर झारखंड में भी JPSC फर्जीवाड़ा, सेटिंग वाले अभ्यर्थियों की OMR में भरे जाते थे सही जवाब

Published: Sun, 30 Aug 2026 07:29 PM (IST)

सीआईडी ने खुलासा किया है कि जेपीएससी परीक्षाओं में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है, जिसमें ओएमआर शीट और सॉफ्टवेयर में हेराफेरी की गई।

सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया।

सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया।

HighLights

  1. सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया।

  2. उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ओएमआर शीट और सॉफ्टवेयर में हेराफेरी हुई।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं प्रतियोगिता परीक्षा में फर्जीवाड़ा, ओएमआर शीट में हेराफेरी सहित अनियमितता के सभी बिंदुओं पर छानबीन कर रही सीआईडी ने पाया है कि उत्तर प्रदेश की परीक्षाओं में जिस तरह की अनियमितता की गई, उसी तर्ज पर जेपीएससी की परीक्षा में भी फर्जीवाड़ा किया गया है।

सीआईडी ने परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के कर्मी हेमंत वर्मा से पूछताछ की तो उसने कई अहम जानकारियां सीआईडी को दी है। उसने बताया है कि टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के कहने पर जेपीएससी के लिए सॉफ्टवेयर व पोर्टल में फर्जीवाड़ा किया गया। उसने यह भी बताया कि फर्जीवाड़ा में एक संगठित गिरोह सक्रिय था।

हेमंत वर्मा ने सीआईडी को बताया है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में आरओ, एआरओ परीक्षा में फर्जीवाड़ा हुआ था। उसी तर्ज पर जेपीएससी की परीक्षाओं में भी हेराफेरी की गई थी।

वर्ष 2020 में ही टीडीपीएल एजेंसी के निर्देश पर फर्म पिकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने यूपी विधानसभा आरओ, एआरओ परीक्षा के लिए साफ्टवेयर तैयार किया था। इसके एवज में 3.5 लाख रुपये मिले थे। उक्त परीक्षा में गड़बड़ियों की जांच के लिए हाईकोर्ट ने सीबीआइ को आदेश दिया था, जिसके विरुद्ध सरकार सर्वोच्च न्यायालय पहुंची थी।

हेमंत वर्मा ने बताया कि वर्ष 2025 में टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह व सत्यपाल सिंह ने पिकर टेक्नोलॉजी के दूसरे निदेशक उस्मान को जेपीएससी परीक्षाओं के लिए साफ्टवेयर व पोर्टल तैयार करने का काम सौंपा था। इसमें पिकर टेक्नोलॉजी का नाम बैंकग्राउंड में रखा गया और उसके कर्मी टीडीपीएल के नाम से काम करने लगे।

टीडीपीएल ने टीम के रांची आने-जाने, रहने व खाने के खर्च के अलावा तीन लाख रुपये प्रति माह वेतन देने का वादा किया था। इसके अतिरिक्त फर्जीवाड़ा के तहत मिलने वाली राशि की 20 प्रतिशत राशि कमीशन में देने का लालच दिया था।

सेटिंग वाले अभ्यर्थियों के ओएमआर में सही उत्तर भरते थे रामवीर, सत्यपाल, उस्मान व प्रदीप

हेमंत वर्मा ने सीआइडी को बताया कि 14वीं जेपीएससी (रेगुलर/बैकलाग) परीक्षा, ड्रग इंस्पेक्टर, एपीपी रेगुलर और बैकलॉग, एसीएफ तथा एफआरओ जैसी परीक्षाओं के वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) और एडमिट कार्ड जनरेशन का टीडीपीएल ने काम संभाला था।

हेमंत और संजय ने माइक्रोसॉफ्ट एप्लिकेशन का उपयोग कर कोडिंग के जरिए ओटीआर और ओएसएम जनरेशन सॉफ्टवेयर डेवलप किया था। इसका बैक एंड डेटाबेस उस्मान संभालता था। स्कैनिंग के दौरान ओएमआर शीट हैंडओवर होते ही रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, उस्मान और प्रदीप कुमार सिंह सेट किए गए अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में सही उत्तर भरते थे।

प्रदीप उस ओएमआर शीट को स्कैन कर सिस्टम में अपलोड करता था, जिससे रिजल्ट प्रोसेस होता था। इस तरीके से 14वीं जेपीएससी पीटी में 100 से अधिक अभ्यर्थियों को पास कराया गया था। परीक्षा केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाएं आने के बाद संजय और प्रदीप उन्हें स्कैन करते थे।

उस्मान सेटिंग वाले अभ्यर्थियों का बारकोड लाता था। चिन्हित ओएमआर शीट में पीडीएफ एडिटर के माध्यम से नंबर बढ़ाकर छेड़छाड़ की जाती थी। संजय बैक एंड सर्वर में भी डेटा बदलता था।

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