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झारखंड में 35 लाख घरों तक नल से जल पहुंचा, वर्षा जल का संचयन 20 प्रतिशत बढ़ा; राष्ट्रीय औसत में पीछे

Published: Thu, 05 Nov 2026 04:30 PM (IST)

झारखंड ने 26 सालों में पेयजल उपलब्ध कराने में बेहतर प्रदर्शन किया है, जहाँ 35 लाख घरों तक नल से ...और पढ़ें

राष्ट्रीय औसत 82.47 प्रतिशत से पीछे है झारखंड, अभी 55.89 प्रतिशत घरों तक ही पहुंच रहा जल।

राष्ट्रीय औसत 82.47 प्रतिशत से पीछे है झारखंड, अभी 55.89 प्रतिशत घरों तक ही पहुंच रहा जल।

HighLights

  1. 35 लाख घरों तक पाइपलाइन से शुद्ध पेयजल उपलब्ध।

  2. अशुद्ध जल से होने वाली बीमारियों में 75% कमी।

  3. वर्षा जल संचयन में वृद्धि, सोन नदी विवाद सुलझा।

दिव्यांशु, रांची। अलग राज्य बनने के बाद से 26 सालों में झारखंड ने पेयजल उपलब्ध कराने का मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है। साल 2000 में करीब 1.22 करोड़ लोगों को नदी, तालाब और कुओं जैसे असुरक्षित जलस्रोत पर पेयजल के लिए निर्भर रहना पड़ता था।

जबकि साल 2026 में पेयजल स्वच्छता विभाग 35 लाख घरों तक सीधे पाइप कनेक्शन के जरिए पेयजल पहुंचा रहा है। इसके अलावा 2 करोड़ से अधिक लोग सामुदायिक जलापूर्ति की योजना से पेयजल ले रहे हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र में जल जीवन मिशन और राज्य सरकार की योजना से घरों तक कनेक्शन पहुंचाया जा रहा है।

अगले दो साल में 65 लाख घरों तक पाइप से कनेक्शन कर जल पहुंचा दिया जाएगा। पेयजल स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताया है। राज्य सरकार ने बजट में भी हैंडपंप, छोटे तालाब निर्माण के लिए राशि की व्यवस्था की है।

हालांकि नल से जल उपलब्ध कराने के मामले में राष्ट्रीय औसत 82.47 प्रतिशत से झारखंड अभी पीछे है। राज्य में अभी 55.89 प्रतिशत घरों तक ही जल पहुंचाया गया है। लेकिन पिछले 25 सालों के सतत प्रयास से जलस्रोतों की शुद्धता और गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।

सुरक्षित पेयजल मिलने से लोगों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है। गहन चिकित्सा विशेषज्ञ डाॅ. ऋषिकेश झा ने बताया कि राज्य में अशुद्ध पेयजल पीकर बीमार होने वालों की संख्या में 75 प्रतिशत तक की कमी आई है। यहां तक की बरसात के बाद भी पेयजल से होने वाली बीमारियों में बड़ी कमी आई है।

वर्षा जल संचयन बढ़ा, लेकिन अभी और संरक्षण आवश्यक

राज्य में पहाड़ी संरचना और पठारी भूभाग की वजह से बारिश का करीब 74 प्रतिशत पानी बहकर बाहर चला जाता है।साल 2000 में राज्य इसका करीब छह प्रतिशत ही संचयन कर पाता था। पिछले दस सालों में 7000 नए तालाब बने हैं। इसके अलावा चेकडैम बनाए गए हैं। अगले पांच साल में कुल बारिश का 40 प्रतिशत तक जल संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

पर्यावरणविद नीतीश प्रियदर्शी ने बताया कि आवासीय क्षेत्र मे वर्षा जल संरक्षण के लिए राज्य सरकार को विशेष अभियान चलाना होगा। अगर कुल बारिश का 40 प्रतिशत जल संरक्षित कर लिया गया तो भू-गर्भजल का स्तर भी बढ़ेगा जिसका लाभ कृषि क्षेत्र को होगा।

अंतरराज्यीय जल विवाद सुलझा

पिछले 25 सालों से झारखंड और बिहार के बीच सोन नदी के जल बंटवारा को लेकर विवाद की स्थिति थी। साल 2026 में दोनों राज्य सरकारों के बीच इसे लेकर समझौता हो गया है। इस समझौते से झारखंड को 2 मिलियन एकड़ घनफीट पानी मिला है। इससे पलामू प्रमंडल के जिलों में जल उपलब्धता बढ़ी है जिससे पेयजल की समस्या खत्म होगी।

30 प्रतिशत भूमि पर संक्रमित जल की समस्या

झारखंड के 30 प्रतिशत क्षेत्र में फ्लोराइड, आर्सेनिक और आयरन मिश्रित जल की समस्या है। इसके समाधान के लिए राज्य सरकार ने जल जांच प्रयोगशाला की स्थापना की है। जल सहियाओं के पास इसके लिए किट उपलब्ध कराए गए हैं। एनएबीएल सर्टिफाइड प्रयोगशालाओं में न्यूनतम शुल्क देकर जल में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया की जांच कराई जा सकती है।

राज्य सरकार ने अगले दो वर्षों में सभी जिलों में एनएबीएल द्वारा स्वीकृत जल जांच प्रयोगशाला बनाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि अभी सभी जिलों में जल जांच प्रयोगशाला कार्यरत है जिसे अपग्रेड किया जाएगा।

29 हजार जल सहिया कर रहीं संरक्षण का प्रयास

जलस्रोतों के रखरखाव, स्वच्छता जैसे कार्यों के लिए राज्य में 29756 जल सहिया कार्यरत हैं। इन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देकर हैंडपंप, सोलर वाटर सिस्टम जैसे जलस्रोतों की देखरेख, मरम्मत के काम में दक्ष बनाया गया है।

महिलाओं की भागीदारी से सामुदायिक जल संरक्षण के प्रयासों को भी बल मिला है। हर घर जल अभियान के तहत जल सहिया लोगों से इसके लिए लगने वालेे शुल्क का संग्रह भी करती हैं। जलस्रोतों के आसपास स्वच्छता के लिए इनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

राज्य में सिंगल विलेज सिस्टम उपयोगी

ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के घर तक पेयजल पहुंचाने के लिए पिछले 25 सालों में अनेक प्रयोग किए गए। इसमें सिंगल विलेज सिस्टम के तहत अब घरों तक जल पहुंचाया जा रहा है। इसमें गांव के किसी एक जल स्रोत के पास पंपिंग स्टेशन बनाकर छोटे ट्रीटमेंट प्लांट से जल को शुद्ध किया जाता है।

इसमें उर्जा के लिए सोलर सिस्टम का उपयोग किए जाने से इसकी लागत भी कम आती है। राज्य के गांवों के पास झरने, नदी या तालाब जैसे पारंपरिक जलस्रोत हैं। इसकी छोटी संरचना होने से यह आसानी से इंस्टाल भी हो जाता है।

राज्य सरकार की प्राथमिकता लोगों को शुद्ध पेयजल पहुंचाने की है। सिंगल विलेज सिस्टम समेत पेयजल की सभी योजनाओं को इस साल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है जल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है। जल जीवन मिशन समेत जितनी भी योजनाएं राज्य में चल रही हैं उनकी मानिटरिंग की जा रही है। लोगों को समय पर शुद्ध पेयजल मिले इसके लिए घरों तक पाइप लाइन बिछाने का काम लगभग हो चुका है। राज्य सरकार अपने संसाधन से भी जलापूर्ति की योजना पूरी करने में लगी है। आने वाले सालों में राज्य के प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल पाइप लाइन के जरिए पहुंचाया जाएगा। इसके साथ वर्षा जल संचयन में सरकार और समाज दोनों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

-योगेंद्र प्रसाद, पेयजल स्वच्छता मंत्री, झारखंड सरकार

झारखंड में जलापूर्ति और जल संरक्षण: एक नजर

श्रेणी / वर्ष विवरण / स्थिति मुख्य बिंदु / आंकड़े
वर्ष 2000 में जलापूर्ति प्रारंभिक स्थिति राज्य में कुल 60 हजार घरों तक जलापूर्ति
वर्ष 2019 में ग्रामीण जलापूर्ति उस समय की स्थिति मात्र 6 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक
वर्ष 2026 में जलापूर्ति (वर्तमान) प्रगति 55.89% (लगभग 56%) घरों तक जलापूर्ति 

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