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झारखंड में धान अधिप्राप्ति का नया कीर्तिमान: 82% लक्ष्य हासिल, किसानों के खाते में पहुंचे 1206 करोड़

Published: Wed, 13 May 2026 08:40 PM (IST)

झारखंड ने धान अधिप्राप्ति में नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जहां 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के विरुद्ध 75.29 लाख ...और पढ़ें

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. 75.29 लाख क्विंटल धान की रिकॉर्ड खरीद हुई।

  2. 78 हजार से अधिक किसानों को 1206 करोड़ मिले।

  3. पूर्वी सिंहभूम जिला धान खरीद में सबसे आगे रहा।

राज्‍य ब्‍यूरो, रांची। झारखंड राज्य ने इस वर्ष धान अधिप्राप्ति के क्षेत्र में अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है। हाल के वर्षों में पहली बार राज्य ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां न केवल खरीद का आंकड़ा अपने सर्वोच्च स्तर पर रहा, बल्कि भुगतान की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी रही। 
 
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक लगभग 50 लाख टन (75.29 लाख क्विंटल) धान की अधिप्राप्ति की जा चुकी है। 
 

किसानों को मिला सीधा लाभ  

राज्य ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के 78 हजार से अधिक किसानों के बीच 1206.62 करोड़ रुपये की राशि का वितरण किया गया है। उल्लेखनीय है कि झारखंड सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बोनस मिलाकर किसानों को 2450 रुपये प्रति क्विंटल की आकर्षक दर से भुगतान किया है। 

पूर्वी सिंहभूम जिला रहा सबसे आगे  

यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में एकमुश्त भेजी गई है। धान अधिप्राप्ति के मामले में इस बार पूर्वी सिंहभूम जिले ने राज्य में सर्वाधिक धान उपलब्ध कराकर पहला स्थान प्राप्त किया है। 
 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 15 दिसंबर 2025 से शुरू हुई यह खरीद प्रक्रिया 30 अप्रैल 2026 तक चली। पूर्व के वर्षों (जैसे 2021-22) के विपरीत, इस बार पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई ताकि केवल स्थानीय किसानों को ही इसका लाभ मिले।


योजना की प्रमुख विशेषताएं: 

  •     कुल अधिप्राप्ति: लक्ष्य का लगभग 82 प्रतिशत (75.29 लाख क्विंटल)। 
  •     निर्धारित मूल्य: 2450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित)।
  •     क्रय केंद्रों का जाल: राज्य भर में किसानों की सुविधा के लिए 783 से अधिक केंद्र संचालित किए गए।
  •     समय सीमा: खरीद प्रक्रिया 15 दिसंबर 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक चली।


झारखंड सरकार की इस तत्परता ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है। भुगतान में देरी न होने के कारण किसानों में उत्साह देखा जा रहा है, जिससे आगामी कृषि सीजन के लिए उनकी वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हुई है।