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झारखंड में 'जीरो ड्रॉपआउट' की तैयारी, डहर पोर्टल पर हाउसहोल्ड सर्वे से होगी स्कूल न जाने वाले बच्चों की पहचान

Published: Wed, 28 Oct 2026 09:54 AM (IST)

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) डहर पोर्टल के माध्यम से बसावट मैपिंग और घरेलू सर्वेक्षण कर रहा है। इसका उद्देश्य ...और पढ़ें

झारखंड में जीरो ड्रॉपआउट की तैयारी (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

झारखंड में जीरो ड्रॉपआउट की तैयारी (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. डहर पोर्टल पर बसावट मैपिंग और घरेलू सर्वेक्षण।

  2. 3-18 वर्ष के ड्रापआउट बच्चों की पहचान की पहल।

  3. 'जीरो ड्रॉपआउट हैबिटेशन' बनाना मुख्य लक्ष्य।

कुमार गौरव, रांची। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) द्वारा डहर पोर्टल पर बसावट मैपिंग और घरेलू सर्वेक्षण (हाउसहोल्ड सर्वे) के दम पर स्कूलों में ड्रापआउट बच्चों को संख्या को पाटने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसे लेकर बाकायदा कार्ययोजना तैयार की गई है। 

इसका उद्देश्य राज्य भर में स्कूल न जाने वाले बच्चों की पहचान करने और नामांकन ट्रैकिंग को मजबूत करने के लिए एक व्यवस्थित तरीका अपनाना था। 

स्कूल न जाने वाले बच्चों की पहचान करने की पहल 

राज्य कार्यक्रम प्रबंधक और स्कूल न जाने वाले बच्चों की पहचान करने की पहल की नोडल अधिकारी बिनीता तिर्की ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। यह पहल 3 से 18 वर्ष की आयु के उन बच्चों पर केंद्रित है, जिन्होंने कभी स्कूल में दाखिला नहीं लिया है या जो बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके हैं (ड्रापआउट)। 

इस प्रक्रिया में बसावटों को स्कूलों से जोड़ना (मैपिंग), शिक्षकों को नियुक्त करना, परिवारों को आवंटित करना और सर्वेक्षण के लिए कार्यस्थलों की पहचान करना शामिल है। 

योजना और बजट योजना बनाने में करेगी मदद 

मुख्य जिम्मेदारियों में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों द्वारा घरेलू सर्वेक्षण करना, बीआरपी/सीआरपी द्वारा कार्यस्थलों का सर्वेक्षण करना और घरेलू डेटा एकत्र करने के साथ-साथ ड्रापआउट बच्चों की पुष्टि करना शामिल है। 

एकत्र किया गया यह डेटा 'समग्र शिक्षा वार्षिक कार्य योजना और बजट 2026-27' के तहत योजना बनाने में मदद करेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य 'जीरो ड्राप आउट हैबिटेशन' बनाना है। इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी बसावट में 6 से 18 वर्ष की आयु के सभी बच्चे स्कूल में नामांकित हों, सभी आवंटित परिवारों का सर्वेक्षण किया जा चुका हो और आवश्यक घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) पूरा कर लिया गया हो। 

स्कूल प्रशासन, जिला अधिकारियों और अधिकृत साझेदारों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से जेईपीसी का लक्ष्य स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान करना, उन्हें शिक्षा से जोड़ने में मदद करना और 'सभी के लिए शिक्षा' के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।

ये हैं मुख्य समय-सीमाएं :

  • 10 नवंबर 2026 से पहले बसावट (हैबिटेशन) की मैपिंग पूरी की जानी है
  • परिवारों का सर्वेक्षण और ड्रापआउट सत्यापन 20 प्रतिशत, 40 प्रतिशत, 60 प्रतिशत, 80 प्रतिशत और शत प्रतिशत के चरणों (माइलस्टोन) में पूरा किया जाएगा
  • 9 नवंबर 2026 तक बसावट की मैपिंग और बसावट के साथ शिक्षकों की टैगिंग पूरी की जानी है
  • परिवारों का सर्वेक्षण 10 नवंबर 2026 से 10 जनवरी 2027 तक होगा
  • 10 जनवरी 2027 तक पूरा सर्वेक्षण कार्य संपन्न करना है।

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