14 एकड़ में बनेंगे 14 मंजिला नौ ब्लाक, 10 साल बाद रांची स्मार्ट सिटी में सबके लिए खुले फ्लैट खरीदने के रास्ते
रांची स्मार्ट सिटी में दस साल के लंबे इंतजार के बाद पहली निजी आवासीय परियोजना को मंजूरी मिल गई है। ...और पढ़ें

जमीन के म्यूटेशन का पेंच दूर होने के बाद खुला निर्माण का रास्ता।
HighLights
रांची स्मार्ट सिटी में पहली निजी आवासीय परियोजना स्वीकृत।
14 एकड़ में 14 मंजिला नौ ब्लॉक, कुल 378 फ्लैट।
जमीन म्यूटेशन का पेंच सुलझने से निर्माण का रास्ता साफ।
आदिल हसन, रांची। दस साल का लंबा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। रांची स्मार्ट सिटी में अब सिर्फ मंत्रियों के बंगले ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी आवास उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।
यहां पहली बार निजी आवासीय सोसायटी के निर्माण के लिए नक्शा पास किया गया है। नगर विकास विभाग ने आइलिका स्टेट प्राइवेट लिमिटेड को 14 एकड़ जमीन पर आवासीय परिसर बनाने की स्वीकृति दी है।
इसके साथ ही आने वाले दिनों में आम लोग भी रांची स्मार्ट सिटी में अपने फ्लैट की बुकिंग करा सकेंगे। स्वीकृत नक्शे के अनुसार, कंपनी 14 मंजिला नौ ब्लाकों का निर्माण करेगी। प्रत्येक मंजिल पर तीन फ्लैट होंगे।
इस हिसाब से परिसर में कुल 378 फ्लैट बनाए जा सकेंगे। यहां रहने वालों को स्वीमिंग पुल, कम्युनिटी हाल, बच्चों के खेलने का क्षेत्र और पार्क जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। हालांकि, फ्लैट की कीमत और बुकिंग शुरू होने की तारीख अभी सामने नहीं आई है।
2016 में शुरू हुई थी स्मार्ट सिटी की योजना
रांची को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना वर्ष 2016 में शुरू हुई थी। 30 सितंबर 2016 को रांची स्मार्ट सिटी कारपोरेशन लिमिटेड का गठन किया गया। धुर्वा स्थित एचईसी क्षेत्र की करीब 656 एकड़ जमीन पर ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी विकसित करने की योजना बनाई गई।
वर्ष 2017 में परियोजना की आधारशिला रखी गई और फरवरी 2019 में आधारभूत संरचना के निर्माण का काम शुरू हुआ। लेकिन विडंबना यह रही कि सड़क, बिजली, पानी और दूसरी आधारभूत सुविधाओं के विकास के बावजूद आम लोगों के लिए आवासीय परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकीं।
स्मार्ट सिटी में मंत्रियों के बंगले बनकर तैयार हो गए और उनमें मंत्री रहने भी लगे, लेकिन आम लोगों के लिए फ्लैट का सपना अधूरा रहा।
जमीन के म्यूटेशन ने अटका रखा था निर्माण
आवासीय परियोजनाओं के शुरू नहीं होने की सबसे बड़ी वजह जमीन का म्यूटेशन था। एचईसी से जमीन अधिग्रहण के बाद राजस्व अभिलेखों में स्वामित्व का हस्तांतरण सही तरीके से नहीं हुआ था। बाद में राज्य सरकार और स्मार्ट सिटी कारपोरेशन के नाम जमीन का म्यूटेशन भी लंबित रहा।
इस कारण नीलामी में भूखंड लेने वाली कंपनियां जमीन पर निर्माण शुरू नहीं कर पा रही थीं। नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया भी इसी तकनीकी और कानूनी पेंच में फंसी हुई थी।
वर्ष 2026 में जिला प्रशासन की ओर से स्मार्ट सिटी की करीब 475 एकड़ जमीन का म्यूटेशन पूरा किए जाने के बाद स्थिति बदली। निवेशकों के नाम जमीन के अभिलेख दुरुस्त होने लगे। इसके बाद निजी परियोजनाओं के नक्शे पास करने का रास्ता खुला। आइलिका स्टेट की आवासीय परियोजना को मिली मंजूरी इसी बदलाव का नतीजा है।
करीब पांच हजार फ्लैट बनाने की है योजना
स्मार्ट सिटी के मास्टर प्लान में आवासीय विकास के लिए करीब 79.8 एकड़ जमीन निर्धारित की गई है। यहां अलग-अलग आय वर्ग के लोगों के लिए करीब पांच हजार फ्लैट बनाने की योजना है। इसके लिए निजी कंपनियों को आवासीय भूखंड आवंटित किए गए हैं।
मई 2026 में दो आवासीय परियोजनाओं के नक्शे लंबित होने की जानकारी सामने आई थी। अब पहली परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद दूसरे प्रस्तावों पर भी निर्णय का इंतजार है।
आवास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और कारोबार का भी केंद्र बनेगी स्मार्ट सिटी
656 एकड़ में विकसित हो रही रांची स्मार्ट सिटी में सिर्फ आवासीय परिसर ही नहीं, बल्कि आधुनिक शहरी सुविधाओं का पूरा ढांचा तैयार करने की योजना है।
यहां मेडिकल कालेज, अस्पताल, स्कूल, तकनीकी और कौशल विकास संस्थान, आइटी पार्क, माल, होटल और व्यावसायिक परिसर प्रस्तावित हैं। इसके अलावा पार्क, हरित क्षेत्र, अर्बन हाट और रिवर फ्रंट विकसित करने की भी योजना है।
शहर में चौड़ी सड़कें, भूमिगत बिजली व्यवस्था, जलापूर्ति, सीवरेज, वर्षा जल निकासी, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
करीब डेढ़ लाख की आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही इस परियोजना में अब निजी आवासीय निर्माण की शुरुआत सबसे अहम कदम माना जा रहा है।
