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SIR Jharkhand: मतदाताओं को राहत, सुनवाई में नहीं जाना पड़ेगा ERO कार्यालय, घर बैठे दस्तावेज जमा और सुनवाई

Published: Sun, 27 Sep 2026 07:26 PM (IST)

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के तहत अब मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने या सुनवाई के लिए ईआरओ ...और पढ़ें

अब घर जाकर बीएलओ लेंगे दस्तावेज, विशेष परिस्थितियों में होगी ऑनलाइन सुनवाई।

अब घर जाकर बीएलओ लेंगे दस्तावेज, विशेष परिस्थितियों में होगी ऑनलाइन सुनवाई।

HighLights

  1. बीएलओ घर जाकर मतदाताओं से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगे।

  2. विशेष परिस्थितियों में ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई आयोजित की जाएगी।

  3. मतदाताओं को ईआरओ/एईआरओ कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं को दस्तावेज देने या सुनवाई के लिए अब निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) या सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (एईआरओ) कार्यालय का चक्कर लगाना नहीं पड़ेगा। उन्हें अनावश्यक भीड़ की परेशानी से भी जूझना नहीं होगा।

अब बीएलओ उन मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगे, जिन्हें दावा-आपत्ति चरण में नोटिस भेजा गया है। विशेष परिस्थितियों में आनलाइन सुनवाई होगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने रविवार को सभी जिलों में एसआइआर से संबंधित पदाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा यह व्यवस्था की गई है कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर नोटिस की सुनवाई के लिए मतदाताओं को ईआरओ कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी।

जिन व्यक्तियों को अनमैप्ड अथवा लाजिकल डिस्क्रेपेंसी के संबंध में नोटिस जारी किया गया है, उनके घर पर बीएलओ द्वारा स्वयं जाकर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर ईसीआइनेट पर अपलोड किए जाएंगे, ताकि ईआरओ द्वारा नियमानुसार निर्णय लिया जा सके।

उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आवश्यकतानुसार बीएलओ को घर-घर सत्यापन के दौरान बीएलओ सुपरवाइजर के द्वारा सहयोग किया जाएगा। वैसे बीएलओ जो तकनीकी रूप से ईसीआइनेट पर दस्तावेज को अपलोड करने में कमजोर हैं, उनकी सहायता के लिए जिला निर्वाचन पदाधिकारी आवश्यकतानुसार वालेंटियर एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराएं।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं को पूर्व में नोटिस की सुनवाई के लिए निर्धारित स्थल पर आने की सूचना दी जा चुकी है और वे स्वयं सुनवाई स्थल पर पहुंचते हैं, तो ऐसी स्थिति में वहां संबंधित पदाधिकारी उपलब्ध रहें। कोई भी मतदाता सुनवाई के लिए आए और उसे संबंधित पदाधिकारी उपलब्ध न मिले, ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।

सुनवाई के लिए किसी को अधिकृत भी कर सकेंगे मतदाता

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा कि जिन व्यक्तियों को अनमैप्ड अथवा लाजिकल डिस्क्रेपेंसी सूची में नोटिस प्राप्त है, उन्हें सामान्यतः ईआरओ/एईआरओ कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में ईआरओ के निर्णयानुसार सुनवाई आयोजित की जाएगी। यह सुनवाई भी आनलाइन होगी।

आवश्यकता पड़ने पर निर्वाचक द्वारा परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में उपस्थित होने के लिए अधिकृत किया जा सकेगा। साथ ही, जिला निर्वाचन पदाधिकारी आनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को सुदृढ़ एवं पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करेंगे।

आश्रय स्थलों में रहनेवाले लोगों के लिए विशेष शिविर

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी आवश्यकतानुसार रात्रि आश्रय स्थलों में रहने वाले व्यक्तियों, श्रमिकों, गरीब, बेघर एवं अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क/विशेष शिविर आयोजित करना सुनिश्चित करें।

इसके साथ-साथ आउटरीच प्रोग्राम के तहत मतदाताओं को फार्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में जोड़ने एवं वर्तमान में मतदाताओं से प्राप्त फार्म-6, 6ए, 7 एवं 8 द्वारा प्राप्त आवेदनों का डिजिटाइजेशन करें।

30 को खत्म हो रहा दावा-आपत्ति का चरण

दावा आपत्ति का चरण 30 सितंबर को खत्म हो रहा है। हालांकि संभावना जताई जा रही है कि एक बार फिर इसकी तिथि बढ़ सकती है। बताते चलें कि इससे पहले दो बार इसकी तिथि बढ़ाई गई है। अबतक मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 6.15 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं, 4.12 लाख आवेदन सुधार के लिए प्राप्त हुए हैं।

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