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राजभाषा का दर्जा, पढ़ाने वालों के पद खाली; झारखंड में उर्दू शिक्षा बदहाल

Published: Tue, 08 Sep 2026 01:13 PM (IST)

झारखंड में उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिलने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था बदहाल है, जहां शिक्षकों के सैकड़ों पद ...और पढ़ें

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HighLights

  1. झारखंड में उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त।

  2. सैकड़ों उर्दू शिक्षकों के पद रिक्त, नियुक्ति प्रक्रिया लंबित।

  3. आरटीआई से रांची में उर्दू शिक्षा की बदहाली उजागर।

संजय कृष्ण, रांची। आजादी से पहले रांची के पठार पर उर्दू को बढ़ावा देने के लिए कई स्कूल खुले। कुछ निजी स्तर पर कुछ सरकारी। आजादी के बाद प्राथमिक स्तर पर पढ़ाई पर जोर दिया गया, लेकिन आज हालत यह है कि सरकार ने इसे द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया है, लेकिन स्कूलों शिक्षकों-छात्रों का अनुपात देखकर कहते हैं कि इसके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है।

वेतन पर करोड़ों खर्च के बाद नतीजा शून्य ही है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में जमीनी हकीकत का पता चलता है। जनवादी लेखक संघ के एमजेड खान कहते हैं कि व्यावहारिक क्रियान्वयन की दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

उर्दू अकादमी की स्थापना, प्रत्येक जिले में उर्दू प्रकोष्ठ, उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों को भरना, अनुवाद केंद्र स्थापित करना और उर्दू पुस्तकालयों को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।

झारखंड बने हुए लगभग 26 साल हो गए लेकिन उर्दू की सूरत ए हाल में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। सरकारी विद्यालयों में उर्दू के सैंकड़ों पद रिक्त पड़े है लेकिन वर्षों से नियुक्ति प्रक्रियाएं लंबित हैं।

सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के रिक्त पद

रांची जिला के शिक्षक अधिकारी से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत 227 राज्यकीय एवं राज्यकृत स्कूलों से प्राप्त सूचना के अनुसार उर्दू की स्थिति बहुत भयावह और चिंता जनक है।

रांची प्रखंड की स्थिति देखकर अनुमान लगा सकते हैं। रांची प्रखंड के 2 दर्जन से अधिक विद्यालयों में 56 उर्दू शिक्षकों के पद आरंभिक काल से स्वीकृत हैं, लेकिन 34 खाली हैं और 22 ही कार्यरत हैं।

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इसी तरह जीएमएस हिंदपीढ़ी उर्दू स्कूल में उर्दू पढ़ने बच्चों की संख्या 425 है। यहां उर्दू शिक्षकों के स्वीकृत सात पद हैं। लेकिन कार्यरत शिक्षक 3 है और खाली चार हैं।

अनुमान लगा सकते हैं कि प्राथमिक स्तर पर पढ़ाई कैसे और किस प्रकार होगी। नीचे और आंकड़े दिए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में दशकों से रिक्त पद भरे नहीं गए, जिसके कारण उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थियों का काफी नुकसान हो रहा है।

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