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झारखंड ट्रेजरी घोटाला: ओटीपी के खेल से उड़ाई करोड़ों की सैलरी, सीआईडी जांच में खुला 'डीडीओ' के मोबाइल का राज

Published: Fri, 01 May 2026 06:43 AM (IST)

सीआईडी की एसआईटी झारखंड के बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में हुए कोषागार घोटाले की जांच तेज कर दी है।

एआई जेनरेटेड तस्वीर

एआई जेनरेटेड तस्वीर

HighLights

  1. सीआईडी ने कोषागार घोटाले की जांच तेज की।

  2. डीडीओ के ओटीपी से अवैध वेतन निकासी हुई।

  3. लेखापालों ने सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर घोटाला किया।

राज्य ब्यूरो, रांची। बोकारो, हजारीबाग और अब चाईबासा में कोषागार से अवैध वेतन निकासी मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। सूक्ष्म स्तर पर घोटाले की परत-दर-परत खंगाली जा रही है। 

इसी छानबीन में पता चला है कि जो भी अनियमितता, छेड़छाड़, खाता नंबर बदलने आदि का खेल किया गया, सबके लिए संबंधित जिले के ड्राविंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) या आहरण एवं वितरण अधिकारी के रजिस्टर्ड मोबाइल पर ओटीपी आया। उस ओटीपी के आधार पर ही पुलिसकर्मी-अधिकारी की जन्मतिथि, खाता नंबर में छेड़छाड़ भी हुआ और पैसे भी निकले। 

इस खेल में डीडीओ की मिलीभगत रही या डीडीओ के साथ विश्वासघात कर लेखपाल ने पूरा खेल किया, इन सभी बिंदुओं पर एसआईटी छानबीन कर रही है। प्रथम दृष्ट्या मामला विश्वासघात का सामने आ रहा है, जिसकी जांच चल रही है।

संचालन की जिम्मेदारी और वित्तीय व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी डीडीओ की

सभी जिलों में वहां के स्वीकृत बल व उपलब्ध बल का पूरा ब्यौरा एक पोर्टल पर होता है। पुलिसकर्मियों-पदाधिकारियों की जन्म तिथि से लेकर उनके बैंक खाते तक वहां उपलब्ध होते हैं। इसी के आधार पर प्रत्येक माह उनका वेतन बनता है। जिले में इस पोर्टल के संचालन की जिम्मेदारी और वित्तीय व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी डीडीओ की होती है। 

डीडीओ के पास वह मोबाइल नंबर होता है, जो बैंक, कोषागार व उस पोर्टल से जुड़ा होता है। जिलों में ऐसे तो एसपी ही डीडीओ होते हैं, लेकिन वे अपना यह पावर अपने नीचे डीएसपी स्तर के अधिकारी को देकर अधिकृत कर देते हैं। जिले में एक डीएसपी डीडीओ का भी चार्ज संभालता है और विधि-व्यवस्था ड्यूटी, सुपरविजन सहित तमाम तरह की पुलिसिंग में भी उलझा होता है।

डीडीओ की व्यस्तता का फायदा उठाता है लेखापाल, करता है पूरा खेल

एसआइटी ने छानबीन में पाया कि एक डीएसपी जो डीडीओ का भ प्रभार संभालता है, वह लेखापाल के दस्तावेज पर आंख मूंदकर भरोसा करता है। उसे लगता है कि वह जिले के पुलिसकर्मियों का काम कर रहा है तो कुछ गलत नहीं कर पाएगा। इसी विश्वास का फायदा उठाकर लेखापाल ने पूरी गड़बड़ी की है। 

सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की जन्मतिथि में छेड़छाड़ कर दो साल, चार साल कम कर दिया। यह मास्टर लागइन पर हुआ, जिसका ओटीपी डीडीओ के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया। बार-बार ओटीपी बताने के झंझट के चलते डीडीओ विश्वास पर लेखापाल को अपना मोबाइल दे दिए और उनके पीठ पीछे यह खेल होता गया। 

सेवानिवृत्त कर्मी की जन्मतिथि कम करने से वह मास्टर लाग-इन में कार्यरत दिखे, उनके नाम पर वेतन बना। उसमें जो खाता नंबर दिया गया, वह लेखापाल के रिश्तेदार व सहयोगी के निकले, जिसमें वेतन का पैसा पहुंचा। एक सेवानिवृत्त कर्मी अपने मूल दस्तावेज के आधार पर पेंशन भी लेता रहा और दूसरी ओर उसके मास्टर लाग-इन में छेड़छाड़ कर उसके नाम पर वेतन भी उठता रहा। 

बोकारो में एसपी कार्यालय के गिरफ्तार लेखापाल कौशल कुमार पांडेय, हजारीबाग में गिरफ्तार लेखापाल शंभू कुमार व अन्य से एसआईटी की पूछताछ में इसकी जानकारी सामने आई है, जिस पर विस्तृत जांच जारी है।