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झारखंड में परिवहन क्रांति के 25 वर्ष: हवाई उड़ानें बढ़ीं, रेल परियोजनाओं में सुस्ती और इलेक्ट्रिक वाहनों का उदय

Published: Tue, 03 Nov 2026 01:37 PM (IST)

झारखंड में पिछले 25 वर्षों में परिवहन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं, जहां हवाई सेवाओं और सड़क नेटवर्क ...और पढ़ें

रेल लाइनों के लिए योजनाएं बनीं लेकिन रफ्तार धीमी, सड़क पर परिवहन की सुविधाएं बढ़ीं। (विजुअल: एआई जेनरेटेड)

रेल लाइनों के लिए योजनाएं बनीं लेकिन रफ्तार धीमी, सड़क पर परिवहन की सुविधाएं बढ़ीं। (विजुअल: एआई जेनरेटेड)

HighLights

  1. हवाई सेवाओं और सड़क नेटवर्क में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई।

  2. रेल परियोजनाओं की धीमी गति, बजट में भारी वृद्धि के बावजूद।

  3. इलेक्ट्रिक वाहन और जलमार्ग विकास पर सरकार का विशेष जोर।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में पिछले 25 वर्षों में परिवहन की सुविधाओं में कई गुना बढ़ोतरी हुई और यह बढ़ोतरी रेलवे, सड़क और हवाई मार्गों पर भी देखी जा सकती है। रांची के अलावा देवघर से नियमित हवाई सेवा शुरू होने का लाभ झारखंड के लोगों को मिल रहा है। यात्रियों की संख्या में नियमित तौर पर इजाफा भी हो रहा है।

रेल लाइनों के लिए बनी योजनाएं सुस्ती की शिकार हैं। हालांकि राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि नियमित तौर पर जमा कराती रही है। परिवहन का सबसे अधिक बोझ सड़क मार्गों पर है।

पिछले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार के लिए सड़कों को तैयार किया गया है। चौड़ी सड़कों की संख्या बढ़ी है। फोर लेन से लेकर आठ लेन तक की सड़कें झारखंड में बनी हैं। हालांकि इन सड़कों के कारण दुर्घटनाओं की रफ्तार भी बढ़ती गई है।

बजट 450 करोड़ से बढ़कर आठ हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा, सुविधाएं कम बढ़ीं

राज्य में तेजी से रेल परियोजनाओं के विस्तार एवं आधुनिकीकरण के लिए बजट में इजाफा तो नियमित तौर पर हुआ है लेकिन इसके अनुरूप परिवर्तन दिख नहीं रहा है। सबसे बड़ा असर रेल मार्गों के निर्माण को लेकर है। अभी तक झारखंड के सभी जिले रेलमार्गों से नहीं जुड़ पाए हैं।

2001 में झारखंड का रेल बजट 450 करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर आठ हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है। वर्तमान में राज्य में संचालित 75,000 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर सरकार का फोकस है।

ओडिशा और पश्चिम बंगाल को जोड़नेवाली सेवाओं पर अधिक जोर दिया जा रहा है। कोयला क्षेत्र से जुड़ी रेल परियोजनाओं के त्वरित कियान्वयन के लिए झारखंड सेंट्रल रेलवे लिमिटेड कंपनी बनाई जा चुकी है। इसके तहत शिवपुर से कठौतिया रेल परियोजना प्रस्तावित है।

इसमें राज्य की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। पूंजी का सामंजन परियोजनाओं के लिए हस्तांतरित होने वाली राजस्व भूमि तथा वन भूमि के मूल्य से होगा। पिरपैंती-जसीडीह रेल परियोजना के तहत रेल लाइन के निर्माण के लिए अनुमानित लागत 2100.00 करोड़ रुपये के विरुद्ध राज्य सरकार आधी रकम 1050 करोड़ रुपये देने को तैयार हो चुकी है। संयुक्त उपक्रम कम्पनी का गठन नई रेलवे परियोजनाओं के निर्माण के लिए किया जा रहा है।

  • झारखंड में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 57 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
  • खड़गपुर से झारसुगुड़ा तक 367 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन को मंजूरी मिली है, जिस पर लगभग 6,528 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह पश्चिम बंगाल, झारखंड तथा ओडिशा के 8 जिलों से गुजरेगी।
  • रांची जंक्शन काे दूसरी ओर से भी खोल दिया गया है। लोगों को अब दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, पटना, और वाराणसी के लिए सीधी ट्रेनें मिलती हैं। रांची से होकर वाराणसी और हावड़ा के लिए वंदेभारत ट्रेन का शुभारंभ किया जा चुका है।
  • पहली बार परीक्षा स्पेशल ट्रेन चलाकर राज्य के छात्रों को राहत प्रदान की गई है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जे-टेट) के अभ्यर्थियों के लिए टाटानगर से देवघर तक ट्रेन चली।

इलेक्ट्रिक वाहनों का भव्य बाजार हो रहा तैयार

झारखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने पूर्व में ही ईवी पालिसी लांच की थी लेकिन उस वक्त लोगों में इसके प्रति रूचि नहीं दिखी। हालांकि सरकार के स्तर से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रहे। केंद्र सरकार का सहयोग भी मिला।

राज्य में पीएम ई-ड्राइव और पीएम ई-बस सेवा को लांच किया जा चुका है। इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन और चार्जिंग के लिए बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत राज्य में एक हजार नए इलेक्ट्रिक ह्विकल चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है।

इसके निर्माण से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर बसों तक के लिए सुविधाएं उपलब्घ हो सकेंगी। राज्य सरकार रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में में पीएम ई-बस सेवा के तहत कुल 400 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव लेकर आगे बढ़ी है।

शुरुआती चरण में 40 से 50 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की प्रक्रिया भी चल रही है। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को राज्य में रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

  • मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना : ग्रामीण इलाकों और स्कूल के बच्चों को शहरों से जोड़ने के लिए इस योजना को मजबूत किया जा रहा है। इसके माध्यम से जीपीएस ट्रैकिंग और जिला परिवहन कार्यालय के माध्यम से सब्सिडी दी जाती है।
  • फेसलेस सेवाओं की ओर बढ़ रही सरकार : परिवहन विभाग, खासकर विभागीय कामकाज को फेसलेस सेवाओं के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहता है। सुविधाओं के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के तहत कई सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है।

जलमार्ग से कारोबार बढ़ाने पर फोकस

साहिबगंज में मल्टी मोडल टर्मिनल राज्य के राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के अंतर्गत गंगा नदी पर जलमार्ग विकास परियोजना के तहत विश्व बैंक के सहयोग से भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा निर्माण किया गया है। जल मार्ग विकास परियोजना का उद्देश्य सुगम एवं लाभकारी परिवहन एवं मालवाहक व्यवस्था प्रदान करना है।

इससे गंगा नदी के किनारे अवस्थित स्थलों के सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था में सुधार, रोजगारों का सृजन तथा व्यापार में बढ़ोतरी होगी। राज्य सरकार द्वारा झारखंड इनलैंड वेसल रूल 2020 के तहत नियमावली का गठन किया जा चुका है।

साहिबगंज जिला के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए मल्टी मोडल टर्मिनल के नजदीक इंडस्ट्रियल सह लाजिस्टिक पार्क का निर्माण भी करने की योजना है। इसके लिए भूमि की पहचान की जा रही है।

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