झारखंड में शिक्षक नियुक्ति अनियमितता जांच तेज, माध्यमिक आचार्य मामले में अवमानना याचिका दाखिल
स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही कमेटी ने अभ्यर्थियों से उनके अंकों का विस्तृत ब्योरा ...और पढ़ें

अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को, वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मांगा जवाब।
राज्य ब्यूरो, रांची। स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मंगलवार को अभ्यर्थियों से उनके अंकों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। इस दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने अभ्यर्थियों की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज कमीशन के समक्ष प्रस्तुत किए।
कमेटी ने निर्देश दिया कि दो अगस्त 2022 के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों से अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रार्थी अपने कोटिवार और विषयवार अंकों का पूरा विवरण निर्धारित फार्मेट में प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
इससे पहले हुई सुनवाई में कमेटी ने जेएसएससी की ओर से प्रस्तुत संशोधित स्टेट मेरिट लिस्ट पर सवाल उठाया था। कमीशन ने कहा था कि जेएसएससी द्वारा प्रस्तुत संशोधित स्टेट वाइज मेरिट लिस्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप नहीं है।
इसके बाद आयोग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप नई संशोधित स्टेट मेरिट लिस्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मीना कुमारी एवं अन्य की ओर से दायर 257 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए मामले की जांच के लिए वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था।
कमेटी को तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपनी थी। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने जांच रिपोर्ट पेश करने की अवधि को तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया है।
माध्यमिक आचार्य नियुक्ति मामले में अवमानना याचिका दाखिल
माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित 2819 अभ्यर्थियों के मामले में हाई कोर्ट के आदेश का निर्धारित समय-सीमा में अनुपालन नहीं किए जाने पर अर्पणा कुमारी एवं अन्य की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
अधिवक्ता चंचल जैन के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि अदालत के स्पष्ट निर्देश के बाद भी संबंधित प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिसके कारण अभ्यर्थियों को दोबारा न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान झारखंड हाई कोर्ट ने 29 अगस्त को आदेश पारित करते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को दोबारा परीक्षा में शामिल हुए 2819 अभ्यर्थियों की आंसर-की दो सप्ताह में जारी करने का निर्देश दिया था।
आयोग को अभ्यर्थियों की मेरिट स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा गया था। हाई कोर्ट ने झारखंड के मुख्य सचिव को प्राथमिकी दर्ज कराने तथा पूरे मामले की जांच सीआइडी से कराने का भी निर्देश दिया था। अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय द्वारा स्पष्ट समय-सीमा तय किए जाने के बाद आदेश का अपेक्षित रूप से अनुपालन नहीं किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया है कि माध्यमिक आचार्य के पदों पर उनके लिए सीट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए, ताकि लंबित न्यायिक कार्यवाही के कारण उनकी नियुक्ति के अवसर प्रभावित न हो।
