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DC की लापरवाही से झारखंड में बालू का संकट: सिर्फ 3 जिलों के उपायुक्त सक्रिय, बाकी 7 जिलों में खनन अटका

Published: Wed, 20 May 2026 01:03 PM (IST)

झारखंड में बालू संकट गहरा गया है क्योंकि अधिकांश जिलों के उपायुक्तों ने बालू खनन की अनुमति पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

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राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में बालू संकट का निदान करने की दिशा में खान एवं भूतत्व विभाग के प्रयासों का असर होता दिख नहीं रहा है। रांची, जमशेदपुर और बोकारो को छोड़ अन्य किसी भी जिले के उपायुक्त इस समस्या के निदान के लिए प्रयासरत नहीं दिख रहे हैं।

यही कारण है कि विभाग की ओर से निर्देश दिए जाने के बावजूद तीन जिलों को छोड़कर किसी और जिले के उपायुक्त ने एक हस्ताक्षर करने की भी जहमत नहीं उठाई।

उपायुक्तों को हस्ताक्षर के लिए विभाग से अनुमति शनिवार को ही मिल गई थी। इसके बावजूद किसी भी उपायुक्त ने हस्ताक्षर नहीं किया है। अगले महीने दस जून से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर राज्य में नदी घाटों से बालू खनन पर रोक लग जाएगी जो 15 अक्टूबर तक जारी रहेगी।

झारखंड के 10 जिलों में स्थित 35 बालू घाटों से खनन के लिए तमाम कागजी प्रक्रिया पूर्ण होने के बावजूद इन घाटों का संचालन पिछले कई महीनों से सिर्फ उपायुक्त का हस्ताक्षर नहीं होने के कारण रुका हुआ है। पिछले दिनों खान सचिव अरवा राजकमल ने अधिसूचना के माध्यम से खनन कार्य शुरू करने से संबंधित आदेश जारी कर दिया।

आदेश जारी होने के बाद रांची, बोकारो और जमशेदपुर के छह खदानों के संचालन की अनुमति तत्काल प्रदान कर दी गई लेकिन अन्य सात जिलों में स्थित 29 खदानों के लिए आदेश जारी नहीं किया गया।

इस कारण से इन घाटों से खनन कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। स्थिति यही रही तो राज्य में बालू संकट बरकरार ही रह जाएगा।

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