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रांची में पुलिस की सख्ती से बालू का संकट: बिहार से हो रही सप्लाई, ₹50 हजार तक हो रही बिक्री

Published: Wed, 13 May 2026 12:46 PM (IST)

रांची में पुलिस की सख्ती और अवैध खनन पर रोक के कारण बालू का गंभीर संकट गहरा गया है, जिससे ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

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आदिल हसन, रांची। राजधानी रांची में बालू का संकट गहराता जा रहा है। पुलिस की सख्ती और भारी जुर्माना के कारण अवैध रूप से तोरपा, सिसई, सोनाहातू, बुंडू के घाटों से निकलने वाला बालू रांची नहीं पहुंच पा रहा है।

इस कारण बिहार से आने वाले बालू पर निर्भरता बढ़ गई है। इसका फायदा बालू कारोबारी उठा रहे हैं। एक सप्ताह के अंदर बालू का दाम आसमान छूने लगा है। जहां पहले रांची के आसपास इलाके से आना एक गाड़ी टर्बो बालू (100 सीएफटी)करीब 3000 से 3500 से मिल रहा था, वो अब 7 हजार में भी मुश्किल से मिल रहा है।

इतना ही एक गाड़ी टीपर बालू एक सप्ताह पहले जहां 6500 से 7 हजार के बीच बिक रहा था, वह अब 11 से 12 हजार रुपये प्रति टीपर बिक रहा है। ट्रेलर में बिहार से रांची आने वाला बालू जहां 30 से 32 हजार में बिक रहा था, अब उसकी कीमत 45 से 50 हजार रुपये पहुंच गई है।

इतना ही नहीं अगले महीने 10 जून से 15 अक्टूबर तक झारखंड में बालू घाटों से खनन पर एनजीटी की रोक प्रभावी हो जाएगी। इसके बाद बालू का संकट और बढ़ जाएगा।

नीलामी के बाद भी पर्यावरण मंजूरी में फंसा मामला

झारखंड में पेसा नियमावली लागू होने के बाद 13 जनवरी 2026 को झारखंड हाई कोर्ट द्वारा बालू घाटों और लघु खनिज के आवंटन पर लगी रोक हटाए जाने से लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें सरकारी दर पर बालू मिल सकेगा। लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी रांची में हालात जस के तस हैं।

आम लोगों को अब भी ब्लैक में ऊंचे दाम पर बालू खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। रांची जिले के 19 बालू घाट भी नीलाम हो चुके हैं, लेकिन नीलामी के बाद अब प्रक्रिया पर्यावरण मंजूरी (ईसी) और अन्य कागजी औपचारिकताओं में अटक गई है। झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड के अनुसार रांची के 19 घाटों में से केवल तीन घाटों का ही ईसी ट्रांसफर हो पाया है।

शेष 16 घाटों में निविदादाताओं को पर्यावरण स्वीकृति, ग्रांट आर्डर, स्टांप ड्यूटी समेत अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद ही खनन शुरू करने की अनुमति मिलेगी।

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