Jharkhand Foundation Day: शहरों में फ्लाईओवर, हर जिले तक फोरलेन... जानिए हेमंत सरकार का नया रोडमैप
झारखंड ने राज्य गठन के बाद से सड़क बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय प्रगति की है, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार हुआ है और कुल सड़क घनत्व में सुधार हुआ है।

राज्य बनने के बाद बीते 26 वर्षों में झारखंड ने सड़क बुनियादी ढांचा के क्षेत्र में एक लंबी छलांग लगाई है।
HighLights
राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 1606 से 4470 किमी हुई।
खतरनाक तैमारा घाटी अब फोरलेन में बदल गई।
हेमंत सरकार का 2040 तक का सड़क विकास रोडमैप।
राज्य ब्यूरो, रांची । 15 नवंबर 2000 को जब नया-नया झारखंड राज्य अस्तित्व में आया था, तब यहां की भौगोलिक और सड़क संरचना की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी।
एक दौर था जब टाटानगर से बनारस जाने वाले भारी ट्रकों के पहिये बुंडू के आगे सांप की तरह रपटीली और खतरनाक तैमारा घाटी की चढ़ाई पर थम जाया करते थे।
ट्रकों को निकालने के लिए स्थानीय युवाओं का सहारा लेना पड़ता था और घंटो जाम की स्थिति बनी रहती थी।
लेकिन, अलग राज्य बनने के बाद बीते 26 वर्षों में झारखंड ने सड़क बुनियादी ढांचा (Road Infrastructure) के क्षेत्र में एक लंबी छलांग लगाई है।
बाबूलाल मरांडी से लेकर वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार तक, हर कार्यकाल में सड़कों के विकास को प्राथमिकता दी गई। आज तैमारा घाटी का वह खतरनाक रास्ता फोरलेन में बदल चुका है, जहां वाहन फर्राटा भरते हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) के मामले में आज झारखंड की भागीदारी राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर हो चुकी है।
1606 किमी से बढ़कर 4470 किमी हुआ नेशनल हाइवे
राज्य गठन के समय (वर्ष 2000) में झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई मात्र 1,606 किलोमीटर थी। साल 2014 तक यह बढ़कर 2,968 किलोमीटर हुई।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की हालिया समीक्षा बैठकों के अनुसार, वर्ष 2026 तक झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार (निर्माणाधीन और स्वीकृत परियोजनाओं को मिलाकर) 4,470 किलोमीटर तक पहुंच चुका है।
वर्तमान में झारखंड में 30 से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग सक्रिय हैं, जिनमें एनएच 19, एनएच 22, एनएच 33 और एनएच 39 जैसे मार्ग बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पिछले दो दशकों में औसतन 83 से 84 किलोमीटर प्रति वर्ष की रफ्तार से एनएच का निर्माण हुआ है।
- बेहतर सड़क घनत्व: झारखंड में प्रति 1,000 वर्ग किलोमीटर पर राष्ट्रीय राजमार्ग का घनत्व लगभग 43.91 किमी है, जो देश के राष्ट्रीय औसत (लगभग 40.20 किमी) से काफी बेहतर है।
- कुल सड़क नेटवर्क: राज्य गठन के समय कुल सड़क घनत्व मात्र 67 किमी प्रति 1000 वर्ग किमी था, जो अब तीन गुना से अधिक बढ़कर 187 किमी प्रति 1000 वर्ग किमी को पार कर चुका है।
पथ निर्माण विभाग की कुल सड़कों की लंबाई 5,400 किमी से बढ़कर 14,973 किमी से अधिक हो गई है। वहीं, ग्रामीण विकास (पीएमजीएसवाई) और जिला परिषदों की सड़कों को मिला लें तो कुल सड़क संजाल 83,000 किलोमीटर से ऊपर पहुंच चुका है।
सड़कों की गुणवत्ता और वर्तमान श्रेणी
राज्य में विभिन्न श्रेणियों के सड़क नेटवर्क की स्थिति निम्नलिखित है:
- सिंगल लेन: 1,009 किमी
- इंटरमीडिएट लेन: 6,660 किमी
- टू-लेन: 4,559 किमी
- फोर लेन: 177 किमी
- सिक्स लेन: 61 किमी
ये प्रोजेक्ट बदल देंगे सूबे की सूरत
झारखंड में कई ऐसी मेगा सड़क परियोजनाएं स्वीकृत अथवा निर्माणाधीन हैं, जिनके पूरा होने के बाद राज्य की आर्थिक और परिवहन तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी:
- वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड कॉरिडोर (6-लेन): झारखंड में इस सड़क की कुल लंबाई 238 किमी तय की गई है। चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, रांची और बोकारो से गुजरते हुए यह पुरूलिया की ओर बढ़ेगी। इसके बनने से रांची से वाराणसी की यात्रा का समय आधा रह जाएगा।
- औद्योगिक गलियारे: रांची-पटना और रायपुर-धनबाद मार्ग के जरिए प्रमुख औद्योगिक शहरों को सीधे जोड़ने की परियोजनाएं तेजी से प्रगति पर हैं।
- शहरी बुनियादी ढांचे: राजधानी रांची में सिरमटोली फ्लाईओवर, इनर रिंग रोड का चरणबद्ध निर्माण, जमशेदपुर का स्वर्णरेखा एलिवेटेड कॉरिडोर और दुमका में मयूराक्षी नदी पर बना 2.34 किमी लंबा 'दिशोम गुरु शिबू सोरेन सेतु' आधुनिक विकास के नए प्रतीक हैं।
राह में चुनौतियां भी कम नहीं
सड़क निर्माण के इस सफर में कई प्रकार की बाधाएं भी सामने आई हैं:
- वन भूमि और पर्यावरण: झारखंड का एक बहुत बड़ा हिस्सा वन भूमि और वन्यजीव अभयारण्यों से घिरा है। एनएच-80 पर मिर्जाचौकी-फरक्का, एनएच-75 पर शंखा से खजूरी और पलमा-गुमला सेक्शन जैसी परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और वन विभाग की मंजूरी में विलंब के कारण कार्य प्रभावित हुए हैं।
- पहाड़ी भू-भाग: भौगोलिक रूप से पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां सड़कें बनाना तकनीकी रूप से कठिन और खर्चीला दोनों है।
- सड़क क्षति और दुर्घटनाएं: एक प्रमुख खनिज उत्पादक राज्य होने के कारण कोयले और लौह अयस्क की ढुलाई में चलने वाले भारी वाहनों के कारण यहां की सड़कें राष्ट्रीय औसत की तुलना में जल्दी खराब होती हैं।
इसके अलावा, सड़क सुरक्षा एक बड़ी चिंता है; सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता के मामले में झारखंड देश में तीसरे स्थान पर है, जहां 78.5 प्रतिशत हादसे गंभीर श्रेणी के होते हैं।
हेमंत सरकार का विजन: वर्ष 2040 का रोडमैप
आने वाले दशकों के लिए राज्य सरकार ने एक मजबूत रोडमैप तैयार किया है:
- रिंग रोड और फ्लाईओवर: वर्ष 2040 तक सभी प्रमुख शहरों के इर्द-गिर्द चौड़ी रिंग रोड और शहरी क्षेत्रों में सुगम यातायात के लिए फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना है।
- कनेक्टिविटी: सभी जिला मुख्यालयों को फोर या सिक्स लेन सड़कों के जरिए राजधानी और उप-राजधानी से जोड़ा जाएगा।
- पर्यटन और रेल सुरक्षा: सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों तक विश्वस्तरीय आवागमन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही, यातायात को बिना बाधा के चलाने के लिए हर रेल फाटक पर फ्लाईओवर या अंडरब्रिज का निर्माण किया जाएगा।
पथ निर्माण सचिव सुनील कुमार प्रसाद के लंबे अनुभव और तकनीकी कौशल के मार्गदर्शन में अब सरकार की पूरी कोशिश बड़े शहरों के साथ-साथ ग्रामीण कस्बों की सड़कों को भी पूरी तरह चाक-चौबंद करने की है।