यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 14, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
JPSC News: सहायक अभियंता नियुक्ति में जेपीएससी ने गलती सुधारी... कहा- पीटी में नहीं दिया आरक्षण
Jharkhand High Court झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को सहायक अभियंता नियुक्ति मामले की सुनवाई हुई। पूर्व में जेपीएससी ने माना ...और पढ़ें

रांची, राज्य ब्यूरो। Assistant Engineer Appointment Case झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सहायक अभियंता नियुक्ति के प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से समय दिए जाने की मांग की गई। जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की है। इस दौरान जेपीएससी की ओर से संशोधित शपथ पत्र दाखिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि पूर्व में दाखिल शपथ पत्र के पारा 21 में प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने की बात कहना गलत है। इसलिए इसमें सुधार किया गया है। जेपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण नहीं दिया है।
पीटी का परिणाम नियमावली के अनुरूप : जेपीएसएसी
पिछली सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया गया कि सहायक अभियंता नियुक्ति मामले में पीटी (प्रारंभिक परीक्षा) का परिणाम नियमावली के अनुसार जारी किया गया है। वैसे अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें सामान्य श्रेणी से ज्यादा अंक मिले हैं।इसे आरक्षण नहीं माना जा सकता है। इस पर प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने विरोध करते हुएकहा कि यदि पीटी परीक्षा में किसी अभ्यर्थी को आरक्षित श्रेणी में रखा जाता है तो उसे ही आरक्षण देना कहते हैं।बता दें इस संबंध में भास्कर ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि सहायक अभियंता की नियुक्ति में कोटिवार परिणाम जारी किया गया है। वहीं, आरक्षित श्रेणी के कुछ अभ्यर्थियों को आरक्षण देते हुए सामान्य श्रेणी में रखा गया है। जबकि पीटी परीक्षा में आरक्षण देने की सरकार की कोई नीति नहीं है।
योगेंद्र साव की जमानत पर 21 को सुनवाई
उधर, झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस अंबुजनाथ की अदालत में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की जमानत पर आंशिक सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई के लिए 21 जून की तिथि निर्धारित की है। इस संबंध में योगेंद्र साव की ओर से निचली अदालत की ओर से सजा को चुनौती दी गई है। याचिका में उनकी ओर से जमानत दिए जाने की भी गुहार लगाई गई है। बता दें कि हजारीबाग के बड़कागांव गोलीकांड मामले में निचली अदालत ने योगेंद्र साव को सजा सुनाई है।
