झारखंड के सभी नगर निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की तैयारी:अब संपत्ति के निबंधन से पहले देना होगा अधिभार
झारखंड सरकार ने नगर निकायों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए संपत्ति निबंधन से पहले अधिभार भुगतान अनिवार्य ...और पढ़ें

नए नियमों के लागू होने के बाद किसी भी व्यक्ति या कारोबारी के लिए स्थानांतरण अधिभार दिए बगैर जमीन पर काम करना या कारोबार शुरू करना संभव नहीं होगा।
HighLights
निबंधन से पहले संपत्ति अधिभार का भुगतान अनिवार्य।
भुगतान के लिए विशेष पेमेंट गेटवे बनेगा।
नगर निकायों की आय में होगी उल्लेखनीय वृद्धि।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में नगर निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार ने नियमों को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त कर दिया है।
अब संपत्ति का निबंधन (रजिस्ट्रेशन) अन्यत्र कराकर अधिभार (सर्च चार्ज/ट्रांसफर ड्यूटी) के खर्च से बचा नहीं जा सकेगा।
इसके लिए झारखंड राज्य नगरपालिका भूमि/भवन स्थानांतरण अधिभार नियमावली, 2026 को कैबिनेट की स्वीकृति के बाद अधिसूचित कर दिया गया है।
नई व्यवस्था की मुख्य बातें
- निबंधन से पहले होगी वसूली: अब जिस भी कार्यालय में संपत्ति का निबंधन कार्य पूर्ण किया जाएगा, वहीं से कर की वसूली भी सुनिश्चित होगी।
यदि संपत्ति का निबंधन संबंधित नगरपालिका क्षेत्र के अलावा किसी अन्य निबंधन कार्यालय में भी होता है, तो वहां के निबंधन पदाधिकारी द्वारा ही अधिभार की राशि वसूली जाएगी।
- स्थानांतरण न होने पर वापसी का प्रविधान: यदि किसी कारणवश संपत्ति का स्थानांतरण नहीं हो पाता है, तो नियमावली के तहत अधिभार की राशि वापस करने का भी प्रविधान रखा गया है।
- पेमेंट गेटवे के जरिए सीधा भुगतान: राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा एक विशेष पेमेंट गेटवे बनाया जाएगा। इसके लिए राज्य शहरी विकास अभिकरण (सुडा) द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा रही है। पेमेंट गेटवे से कटी हुई राशि सीधे संबंधित नगरपालिका द्वारा खोले गए अलग बैंक खाते में जमा होगी।
- स्टांप शुल्क माफी पर स्वतः समाप्त होगा अधिभार: यदि राजस्व विभाग किसी मामले में स्टांप शुल्क माफ करने का निर्णय लेता है, तो अधिभार की राशि भी स्वतः समाप्त हो जाएगी।
निकायों को मिलेगी वित्तीय मजबूती
राज्य के सभी 49 नगर निकायों में एक साथ एक ही डिजिटल प्रक्रिया से यह राशि जमा हो पाएगी। नए नियमों के लागू होने के बाद किसी भी व्यक्ति या कारोबारी के लिए स्थानांतरण अधिभार दिए बगैर जमीन पर काम करना या कारोबार शुरू करना संभव नहीं होगा।
वर्तमान में संपत्ति कर, विज्ञापन कर, जलापूर्ति शुल्क, पार्किंग शुल्क और ट्रेड लाइसेंस आदि से नगर निकायों को कर्मचारियों के वेतन भुगतान और विकास कार्यों में मदद मिलती है।
लेकिन सीमित आय के कारण जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं। इस नई व्यवस्था से शहरी निकायों के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होने की पूरी उम्मीद है।