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काली सूची में शामिल 14 कंपनियों को दोबारा काम देने पर झारखंड में जांच शुरू, सभी उपायुक्त को निर्देश

Published: Sun, 06 Sep 2026 10:00 AM (IST)

कृषि निदेशालय ने काली सूची में डाली गई 14 कंपनियों को फिर से कार्यादेश देने के मामले में जांच के ...और पढ़ें

कृषि निदेशक ने दिए जांच के निर्देश, कहा- जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी कार्रवाई।

कृषि निदेशक ने दिए जांच के निर्देश, कहा- जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी कार्रवाई।

HighLights

  1. काली सूची में शामिल 14 कंपनियों को दोबारा काम देने पर जांच।

  2. भाकपा की शिकायत पर कृषि निदेशालय ने दिए निर्देश।

  3. सभी जिलों के उपायुक्तों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।

राज्य ब्यूरो, रांची। कृषि निदेशालय ने काली सूची में डाली गई 14 कंपनियों को फिर से कार्यादेश देने के मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सभी जिलों के उपायुक्तों को सौंपी गई है। कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को इसकी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के जिला सचिव सह राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार सिंह ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के उप आयुक्त  योगेश ए. रौंडल से पत्राचार कर काली सूची में डाली गई 14 कंपनियों को फिर से कार्यादेश मिलने की जानकारी दी है।

शिकायत में कहा गया है कि झारखंड कृषि निदेशालय ने वर्ष 2023 में जिन 14 कंपनियों को गंभीर अनियमितता के आरोप में काली सूची में डाला था, उन्हें 30 दिनों के भीतर तार्किक आदेश देकर मुक्त कर दिया गया था। जबकि इन कंपनियों ने शर्तों का अनुपालन नहीं किया था।

इन कंपनियों में मोहित इंडिया, मेक नाउ इंडस्ट्रीज, ग्लोबल मैकेनिकल इक्विपमेंट, प्रीमियर इरिगेशन एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, निंबस पाइप्स लिमिटेड, मोहित पालिटेक प्राइवेट लिमिटेड, वेदांता पालीमर्स प्राइवेट लिमिटेड, रूंगटा इरिगेशन लिमिटेड, श्री भंडारी प्लास्टिक प्राइवेट लिमिटेड, भारत ड्रिप इरिगेशन एंड एग्रो, आरएम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर सिस्टम लिमिटेड, समय इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड, दिनेश इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड व इरिलिंक ड्रिप इरिगेशन इंडस्ट्रीज शामिल हैं।

शिकायत में कहा गया कि इन कंपनियों को मुक्त करने संबंधित तार्किक आदेश की पहली शर्त यह थी कि सभी किसानों के यहां लगे कम गुणवत्ता वाले उपकरणों के बैच बदलकर पुन: सीपेट से जांच कराकर रिपोर्ट कृषि निदेशक रांची को समर्पित करेंगे, जो जांच अब तक नहीं हो सकी है।

शर्तों का अनुपालन नहीं होने पर इन कंपनियों को काली सूची में ही माना जाना था, लेकिन उन्हें फिर से कार्यादेश मिल गया और भुगतान भी हो गया। इसकी सीआइटी से जांच कराने की मांग की गई। इधर, यह मामला संज्ञान में आने के बाद कृषि निदेशक ने सभी उपायुक्तों केा इसकी जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। 

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