यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Palamu News: झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों में फिर स्कूलों की प्रार्थना पद्धति बदल रहे मुसलमान
Jharkhand News झारखंड के पलामू जिले में एकबार फिर यह शिकायत सामने आ रही कि सरकारी स्कूलों में मुस्लिम समाज ...और पढ़ें

पलामू, जागरण संवाददाता। Jharkhand Prayer Controversy समाज में एक ऐसी शक्ति काम कर रही है जिसकी मानसिकता झारखंड सरकार के नियम-कानून से अलग हटकर इस्लामी पद्धति कायम करने और उसपर चलने की है। ढाई महीने पहले गढ़वा जिले के कोरवाडीह स्थित मध्य विद्यालय में बच्चों द्वारा हाथ जोड़कर प्रार्थना करने के बजाय हाथ मोड़कर करने का मामला प्रकाश में आया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई और राज्य के सभी विद्यालयों में प्रार्थना के बाबत दिशा-निर्देश जारी किया तो जहां-जहां मनमानी की जा रही थी, स्थिति सामान्य हुई। अब एक बार फिर मुस्लिम बहुल क्षेत्र स्थित कतिपय विद्यालयों में मनमानी शुरू हो गई। इनमें पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड के ठेंकहीटांड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय शामिल है।
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छतरपुर के ठेंकहीटांड में गाइडलाइन का उल्लंघन
दरअसल, पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड के डाली पंचायत स्थित उतक्रमित मध्य विद्यालय ठेंकहीटांड में पहली से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई होती है। सरकार के दिशा-निर्देश के बाद बच्चों ने हाथ जोड़कर प्रार्थना शुरू की। कुछ दिनों यह सिलसिला चला। एक बार फिर कुछ स्थानीय लोगों के दबाव में बच्चे हाथ मोड़कर प्रार्थना कर रहे हैं। सरकार की गाइडलाइन का उल्लंघन हो रहा है।
दैनिक जागरण ने साजिश का किया था पर्दाफाश
दैनिक जागरण ने सबसे पहले गढ़वा जिले के मध्य विद्यालय कोरवाडीह में हाथ मोड़कर प्रार्थना करने का पर्दाफाश किया था। दैनिक जागरण ने राज्यभर के ऐसे स्कूलों की खबर प्रकाशित की थी, जिनमें मुस्लिम समाज के लोगों ने मनमाने तरीके से प्रार्थना और प्रार्थना पद्धति बदल दी थी। बड़ी संख्या में ऐसे स्कूलों के बारे में भी पता चला था, जहां स्कूलों के नाम के आगे उर्दू शब्द जोड़कर उन्हें उर्दू स्कूल घोषित कर दिया गया था। एक षडयंत्र के तहत यह खेल पूरे राज्य में चल रहा था। खबर प्रकाशित होन के बाद शिक्षा मंत्री ने पूरे राज्य के स्कूलों की जांच के आदेश दिए थे। साथ ही स्कूलों के नाम के आगे लिखे गए उर्दू शब्द को मिटवाया गया और वर्षों से चली आ रही हाथ जोड़कर प्रार्थना करने की पद्धति को बहाल किया गया।
डेहरिया गांव में शुक्रवार को नहीं भेजते बच्चे
सरकार के आदेश के बाद अवैध रूप से चल रहे उर्दू विद्यालयों के नाम से उर्दू शब्द हटाया गया। शुक्रवार की छुट्टी रद कर रविवार को शुरू की गई। हालांकि कुछ स्थानों पर अब भी लोग अपनी जिद पर कायम हैं। विश्रामपुर प्रखंड के उतक्रमित मध्य विद्यालय डेहरिया शुक्रवार को खुल रहा है लेकिन लोग अपने बच्चे को नहीं भेजते हैं। इसी तरह उर्दू विद्यालय बाना के नाम से अब भी उर्दू शब्द नहीं हटाया गया है। कूट से ढंक दिया गया था। अब उर्दू के उपर से कूट हटा लिया गया है।
सरकारी गाइडलाइन का पालन हो : मुखिया
डाली पंचायत की मुखिया पूनम जायसवाल से इस बारे में दैनिक जागरण ने बातचीत की। उन्होंने कहा- उत्क्रमित मध्य विद्यालय ठेंकहीटांड में अगर हाथ मोड़कर बच्चे प्रार्थना कर रहे हैं तो यह गलत है। बच्चों को सरकार की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए।
हाथ जोड़ने हेतु समझाया जा रहा : नागेंद्र राम
उत्क्रमित मध्य विद्यालय, ठेंकहीटांड के प्राधानाध्यापक नागेंद्र राम से भी दैनिक जागरण ने विस्तार से बातचीत की। उनका कहना था कि विद्यालय में हाथ मोड़कर प्रार्थना करने की परंपरा चली आ रही है। बच्चों को हाथ जोड़कर प्रार्थना करने के लिए समझाया जा रहा है।
मंगलवार को इसकी जांच की जाएगी : डीएसई
पलामू के डीईओ सह डीएसई अनिल कुमार चौधरी से भी दैनिक जागरण ने इस बारे में बातचीत की। उनका स्पष्ट कहना था कि हाथ मोड़कर नहीं हाथ जोड़ कर सभी को प्रार्थना करना जरूरी है। सोमवार को स्कूल बंद है। मंगलवार को स्कूल खुलने पर इसकी जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
