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मनरेगा खत्म, नई 'वीबी जी रामजी' योजना आई, लेकिन मजदूरों और ठेकेदारों को भुगतान का इंतजार

Published: Mon, 12 Oct 2026 12:48 PM (IST)

झारखंड में SNA Sparsh प्रणाली के कारण सरकारी विभागों में भुगतान प्रक्रिया धीमी हो गई है, जिससे मनरेगा जैसी कई ...और पढ़ें

झारखंड में केंद्रीय योजनाओं का भुगतान अटका, एसएनए स्पर्श बनी बाधा।

झारखंड में केंद्रीय योजनाओं का भुगतान अटका, एसएनए स्पर्श बनी बाधा।

HighLights

  1. एसएनए स्पर्श से झारखंड में सरकारी भुगतान धीमा।

  2. मनरेगा सहित कई केंद्रीय योजनाओं का भुगतान लंबित।

  3. ट्रेजरी में करोड़ों रुपये फंसे, परियोजनाएं प्रभावित।

राज्य ब्यूरो, रांची। एसएनए स्पर्श को लागू करने के पूर्व केंद्र सरकार ने राज्यों को बताया था कि इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और भुगतान प्रक्रिया सरल हो जाएगी। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। भुगतान की प्रक्रिया दुरुस्त नहीं हो सकी।

खासकर झारखंड में सभी विभागों से से भुगतान के लटकने की सूचनाएं आ रही हैं। कार्य विभागों का बजट अटक रहा है, जिससे परियोजनाएं समय पर पूरा नहीं हो पा रही हैं। कई विभागों का तो हाल इतना खराब है कि अधिकारी ठेकेदारों को जवाब देते-देते थक जाते हैं।

कारण एसएनए स्पर्श ही है। इसके तहत ट्रेजरी से बिल पास होने के लिए बड़े पैमाने पर आंकड़े भरने होते हैं और एक भी आंकड़ा नहीं होने की स्थिति में बिल अटक जाता है अथवा रद हो जाता है।

उदाहरण के रूप में मनरेगा के बंद हुए लगभग दो महीने का समय बीत गया, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हो सका है। विकसित भारत जीरामजी योजना लागू भी कर दी गई है, जिसमें अभी भुगतान की शुरुआत भी नहीं की गई है।

बिल बनने की प्रक्रिया अभी धीमी

योजना के तहत बिल बनने की प्रक्रिया अभी धीमी है। दूसरी ओर, जल संसाधन विभाग में जहां विभागीय स्तर पर चार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अटका हुआ है, वहीं बिल पास होने के बाद ट्रेजरी में 60 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान नहीं हो सका है।

सर्वाधिक लंबित भुगतान गिरिडीह की योजनाओं से संबंधित है। इस जिले में 35 करोड़ रुपये का बिल जेनरेट हुआ है जिसमें से लगभग 17 करोड़ रुपये का बिल ट्रेजरी में लंबित है। पलामू में तो और भी बड़ी राशि ट्रेजरी में अटकी हुई है।

नगर विकास विभाग में भी करोड़ों रुपये का भुगतान अटका हुआ है। राजधानी रांची, धनबाद और बोकारो में भी कई योजनाओं का भुगतान नहीं हो पा रहा है। सूत्रों के अनुसार तमाम कार्य विभागों में काम पूर्ण होने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है।

इस व्यवस्था के तहत भुगतान प्रक्रिया में तमाम खामियां उभरकर सामने आ रही हैं। पूरे देश में यही स्थिति है। कई राज्यों की शिकायतें नियमित केंद्र सरकार तक पहुंच रही है। झारखंड भी अछूता नहीं है। हमने अपनी बात वहां तक पहुंचा दी है।
-राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड सरकार

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