गढ़वा, (ब्रजेश मिश्र)। साहस, समर्पण व परिश्रम के बल पर इंसान कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल कर सकता है। इस बात को चरितार्थ किया है मेराल थाना क्षेत्र के अरंगी गांव निवासी प्रगतिशील किसान अयोध्या बि‍ंद ने। अयोध्या बि‍ंद परंपरागत कृषि को छोड़कर आधुनिक खेती करते हुए आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं।

दूसरे लोगों के बीच बन गए हैं म‍िसाल

वह धान, गेहूं व मक्का जैसी परंपरागत खेती से हटकर स्ट्राबेरी स्वीटकॉर्न रेड, फ्रेंच बीन, शिमला मिर्च लेडी, झारखंड हाइब्रिड, वेलकम इत्यादि भिन्न-भिन्न प्रजातियों के पपीता आदि खेती कर लोगों के बीच मिसाल बने हुए हैं। वह स्वयं तो इसकी खेती कर ही रहे हैं। साथ ही दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे घर के आसपास करीब 3 एकड़ जमीन में सालों भर मौसम के अनुकूल भिन्न-भिन्न तरह के साग-सब्जी तथा फल-फूल की खेती करते हैं। अब तो स्थिति यह है कि उनके उच्च शिक्षा प्राप्त पुत्र विपिन व जयकांत भी खेती में ही लग गए हैं।

प्रशिक्षण में मिली नई पद्धति की जानकारी

इसकी प्रेरणा कैसे मिली इस बारे में अयोध्या ने बताया कि कृषि विभाग के आत्मा द्वारा किसानों के लिए आयोजित होने वाले प्रशिक्षण शिविर के दौरान उन्हें पुरानी पद्धति से हटकर नई पद्धति से कृषि कार्य करने के लिए प्रेरणा मिली। इसके साथ-साथ समय-समय पर कृषि विभाग की ओर संचालित निश्शुल्क प्रशिक्षण तकनीक तथा तकनीकी उपकरण भी मिलने लगे। जिससे उनका हौसला और बढ़ता गया। अयोध्या ने बीटीएम अजय साहू की प्रशंसा की। कहा, समय-समय पर आकर न सिर्फ मेरी हौसला अफजाई की बल्कि जब भी जरूरत हुआ हर तरह का सहयोग उपलब्ध कराया। दो-तीन वर्ष के कठिन परिश्रम से अयोध्या तथा उनका परिवार कृषि कार्य में दक्षता प्राप्त की। बेरोजगारी से मुक्त होकर आज आत्मनिर्भर बने।

इस समय अयोध्या बि‍ंद की लहलहा रही खेती

स्ट्राबेरी, स्वीटकार्न, पपीता, शिमला मिर्च, फ्रेंच बीन के साथ-साथ टमाटर, नींबू, बैंगन, फूलगोभी, बंधा गोभी, काबुली चना की फसल लहलहा रही है। उनकी प्रेरणा से सदन कुमार प्रजापति जो पेशे से शिक्षक हैं, चंद्रकांत प्रजापति, शशिकांत प्रजापति आदि ने भी पुरानी कृषि पद्धति को छोड़कर आधुनिक कृषि पद्धति को अपनाया है। साग-सब्जी, फल-फूल की खेती व्यापक पैमाने पर करने लगे हैं। इन लोगों का पूरा परिवार आज सुखी संपन्न और आत्म निर्भर है। इन किसानों ने इंटरक्रॉपि‍ंग विधि का प्रयोग भी किया है। इस विधि के तहत एक ही खेत में एक साथ दो फसल उगाया जाई जाती है। इससे कम खर्च में अधिक उपज और आमदनी हो जाती है।

इंटरक्रापिंग विधि से खेती कर बनाई पहचान

अयोध्या तथा चंद्रकांत के खेतों में इंटरक्रापिंग विधि के तहत पपीता के साथ मिर्च व टमाटर की खेती एक साथ की गई है। इतना ही नहीं बीच-बीच में अरहर भी लगाया गया है। जिसमें काफी फल लगे हैं। स्ट्राबेरी की खेती के बारे में अयोध्या और बीटीएम अजय साहू ने बताया कि अक्टूबर महीने में इसका पौधा लगाया जाता है जिसका फल दिसंबर से तैयार होने लगता है।

500 रुपये प्रत‍ि क‍िलो की दर से बेच रहे स्‍ट्राबेरी

आयरन, हीमोग्लोबिन, फास्फोरस ,विटामिन ई तथा कैल्सियम से भरपूर स्ट्राबेरी के प्रतिदिन उपभोग से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में काफी वृद्धि होती है। यही कारण है कि स्ट्राबेरी की कीमत चार से पांच सौ रुपये प्रतिकिलो होती है। लेकिन, स्थानीय स्तर पर इसकी मांग कम होने के कारण उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता। अयोध्या ने करीब 10 कट़ठा में स्वीटकॉन भी लगाया है। गढ़वा में 30 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से स्वीट कॉर्न बिकता है। बाहर के बाजार में बेच कर अध‍िक पैसा कमा रहे हैं।

निश्शुल्क उपलब्ध कराया जाता है पौधा

प्रखंड तकनीकी पदाध‍िकारी अजय साहू ने बताया कि स्ट्राबेरी का पौधा हिमाचल प्रदेश तथा महाराष्ट्र से मंगाया गया था। स्ट्राबेरी की खेती के लिए किसानों को प्रेरित करने के उद्देश्य से निश्‍शुल्क पौधा उपलब्ध कराया गया है। हरि कुशवाहा ने कहा कि इस तरह की खेती से किसान परिवार के साथ-साथ बड़ी संख्या में मजदूरों को भी रोजगार का अवसर मिलता है।

Edited By: M Ekhlaque