रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand News झारखंड हाई कोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने पर राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह और देवघर के तत्कालीन अंचलाधिकारी अनिल कुमार सिंह को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने उनसे पूछा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। अदालत ने मुख्य सचिव से पूछा है कि क्यों नहीं केंद्रीय कार्मिक विभाग से उनके रेकार्ड में यह प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने को कहा जाए कि उन्हें न्यायिक कार्य में दिलचस्पी नहीं है।

अदालत ने राज्य के कार्मिक विभाग को देवघर के तत्कालीन अंचलाधिकारी को नोटिस भेज कर यह पूछने को कहा है कि 14 जून 2022 के कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। अदालत ने सभी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई नौ नवंबर को होगी। इस संबंध में शहादत हुसैन ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

इस याचिका में कहा गया है कि देवघर के एसडीओ ने वर्ष 1940 में उनके पिता के नाम जमीन की बंदोबस्ती की थी। इसके बाद से उस जमीन पर उनका मालिकाना हक है। देवघर एयरपोर्ट के निर्माण के दौरान उनकी जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया। जमीन अधिग्रहण करने के पहले उन्हें नोटिस भी नहीं दिया गया। उन्होंने इसकी शिकायत की तो अधिकारियों ने उनसे जमीन से संबंधित दस्तावेज जमा करने को कहा।

प्रार्थी के अनुसार वर्ष 1940 में उनके पिता के एसडीओ द्वारा किए गए सेटलमेंट का दस्तावेज सौंपा गया। इसकी जांच के बाद सीओ ने अपना मंतव्य देते हुए कहा कि प्रार्थी के पिता के नाम सेटेलमेंट नहीं हुआ है और उनका दस्तावेज फर्जी है। प्रार्थी की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और पूरे स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इसको लेकर अदालत ने कई बार मुख्य सचिव को निर्देश दिया। लेकिन मुख्य सचिव की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया।

इसके बाद अदालत ने मुख्य सचिव को पूछा कि क्या एसडीओ के आदेश को एक अंचलाधिकारी गलत करार दे सकते हैं। अदालत ने उक्त जमीन की वास्तविक स्थिति से कोर्ट ने मुख्य सचिव को अवगत कराने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव की ओर से दाखिल शपथपत्र में अदालत की ओर से न तो मांगी गई जानकारी दी गई और न ही अंचलाधिकारी के आदेश के बारे में स्थिति ही स्पष्ट की गई। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई और अवमानना का नोटिस जारी किया।

परिवहन सचिव केके सोन के वेतन पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस डा एसएन पाठक की अदालत में राज्य परिवहन कर्मचारियों के पेंशन भुगतान को लेकर दाखिल अवमानना मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आदेश का अनुपालन नहीं होने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद अदालत ने राज्य के परिवहन सचिव केके सोन के वेतन पर रोक लगा दिया है। अदालत ने कहा कि जब तक कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हो जाता है, तब तक सचिव के वेतन पर रोक रहेगी।

परिवहन विभाग के कर्मियों के पेंशन भुगतान का मामला

सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र कृष्णा ने अदालत को बताया कि झारखंड राज्य बनने के बाद परिवहन विभाग के कैडर का बंटवारा किया गया। कई लोग सभी बिहार से झारखंड राज्य में चले आए। उनकी सेवा परिवहन विभाग में समायोजित की गई थी। अब उसमें कई लोग सेवानिवृत्त हो गए हैं। लेकिन राज्य सरकार उनके बिहार की सेवा को पूरी सेवा में नहीं जोड़ा जा रहा और न ही उन्हें पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। जबकि तीन साल पहले ही अदालत ने राज्य परिवहन कर्मचारियों को पेंशन भुगतान का निर्देश दिया था। इसके बाद सरकार ने उक्त आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की थी। सरकार की अपील भी खारिज हो गई। कोर्ट के आदेश पर परिवहन सचिव कोर्ट में उपस्थित थे।

अदालत ने पूछा कि अब तक भुगतान क्यों नहीं किया गया है। इस पर उनकी ओर से कहा गया कि इस मामले में कई विभागों की स्वीकृति जरूरी है। इसलिए देरी हो रही है। अदालत ने कहा कि पूर्व में सरकार ने भी पेंशन भुगतान करने की बात कही थी, लेकिन अब तक पेंशन का भुगतान नहीं करना गंभीर मामला है। अदालत ने सचिव के वेतन पर रोक लगाते हुए कहा कि जब तक कर्मचारियों के पेंशन का भुगतान नहीं हो जाता तक वेतन पर रोक रहेगी।

Edited By: Alok Shahi