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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 06, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jharkhand News: परिवहन विभाग को मिली बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने संपत्ति जब्त करने के आदेश पर लगाई रोक

By Jagran NewsEdited By: Mukul Kumar
Published: Wed, 06 Dec 2023 12:47 PM (IST)

परिवहन विभाग को हाई कोर्ट ने बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने संपत्ति जब्त करने के आदेश पर रोक लगा ...और पढ़ें

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर

HighLights

  1. निचली अदालत ने संपत्ति जब्त करने का दिया था आदेश
  2. परिवहन विभाग ने दायर की थी याचिका

जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड हाईकोर्ट से परिवहन विभाग को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग के संपत्ति जब्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है। निचली अदालत ने काम कराने के बाद भुगतान नहीं करने के मामले में परिवहन विभाग की संपत्ति को जब्त करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ परिवहन विभाग ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

झारखंड में परिवहन विभाग की परिसंपत्तियों को मंगलवार को निचली अदालत के आदेश के बाद जब्त कर लिया गया था। कोर्ट के आदेश से पहुंचे कोर्ट नाजिर जीशान इकबाल और सहयोगी सत्येंद्र कुमार को कार्यपालक दंडाधिकारी पवन कुमार की मौजूदगी में तमाम सामग्रियों की सूची सौंपी गई।

इसके बाद संपत्ति को जब्त कर लिया गया। वर्ष 2004 में शुरू नौ इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट के निर्माण से संबंधित मामले में कोर्ट ने यह आदेश दिया है।

पांच जगहों पर उपलब्ध कराई थी जमीन

यह काम केएस साफ्टनेट सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को मिला था। कंपनी की ओर से कोर्ट को बतााया गया कि उन्होंने लगातार प्रयास किए, लेकिन इसके बावजूद सरकारी मशीनरी की विफलता के कारण काम पूरा नहीं हो सका। नौ में से केवल पांच जगहों पर कंपनी को जमीन उपलब्ध कराई गई।

इसके बाद भी अन्य विभागों से एनओसी नहीं मिल पाई। 2013 में जमीन अधिग्रहण और अन्य समस्याओं को देखते हुए मुख्य सचिव ने काम रोकने का आदेश दिया, जिसपर अमल तो किया गया, लेकिन कंपनी को हर्जाना नहीं मिला।

इसके बाद कंपनी के कांट्रैक्ट को रद किए बगैर संरचनाओं को वाणिज्य कर विभाग को उक्त काम सौंप दिया गया। कंपनी ने कोर्ट में अपील की।

परिवहन विभाग ने 2004 में केएस साफ्टनेट सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ नौ इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट बनाने को लेकर करार किया था, जिसे 2013 में मुख्य सचिव के आदेश से रोक दिया गया। कंपनी ने इसके एवज में हर्जाने की मांग की।

जांच टीम का किया गया था गठन

भुगतान को लेकर कंपनी की मांग पर एक जांच दल का गठन किया गया, जिसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कंपनी इस अवधि में चेकपोस्ट के निर्माण पर 10 करोड़ छह लाख 71 हजार 702 रुपये खर्च कर चुकी है। इसके बाद भी कंपनी को भुगतान नहीं किया गया था।

इसके बाद कंपनी की अपील पर 19 दिसंबर 2017 को कोर्ट ने 15 प्रतिशत ब्याज के साथ राशि भुगतान का निर्देश दिया, जिसपर अभी तक कार्रवाई नहीं की गई थी।

मामले में जुलाई 2023 में कंपनी की ओर से संपत्ति अटैच करने को लेकर आवेदन दिया गया था। इसके बाद अदालत के आदेश पर मंगलवार को संपत्ति जब्ती की कार्रवाई हुई।

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