झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरित कर्मियों की वरीयता पर बड़ा फैसला, कार्मिक विभाग ने जारी किया संशोधित आदेश
झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग ने पारस्परिक स्थानांतरण पर आए कर्मियों की वरीयता निर्धारण को लेकर संशोधित आदेश जारी किया है।

कार्मिक विभाग ने जारी किया संशोधित आदेश (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
कार्मिक विभाग ने पारस्परिक स्थानांतरण वरीयता पर संशोधित आदेश जारी किया।
अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद स्थानांतरित कर्मी कनीय माने जाएंगे।
यह नियम उन्हीं पर लागू, जिनके आदेश में वरीयता अमान्य।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक आधार पर स्थानांतरित कर्मियों की वरीयता निर्धारण को लेकर एक महत्वपूर्ण संशोधित आदेश जारी किया है।
कार्मिक सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के स्तर से जारी इस पत्र में बताया गया है कि यह निर्णय झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर आए कर्मियों की वरीयता को लेकर चल रहे विवादों को स्पष्ट दिशा देगा।
कार्मिक विभाग से नया पत्र जारी किया गया
दरअसल, पूर्व में वर्ष 2024 के दौरान जारी कुछ निर्णयों को संकलित किया गया था। इसमें कार्मिक विभाग के पत्र संख्या 5626 को विलोपित करते हुए और बिहार के पत्रों का हवाला देते हुए कार्मिक विभाग से नया पत्र जारी किया गया था।
इसके अनुसार, अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर झारखंड आने वाले कर्मियों को मूल वरीयता का लाभ नहीं मिलता है और वे अपने कोटि में अपने बैच के कर्मियों की तुलना में सबसे कनीय माने जाते हैं।
कार्मिक सचिव के अनुसार अब सरकार ने विभागीय परिपत्र में एक नई उप कंडिका जोड़ने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार उल्लेखित शर्तें केवल उन्हीं कर्मियों पर लागू होंगी, जिनके पारस्परिक स्थानान्तरण आदेश में ‘वरीयता का दावा मान्य नहीं होगा।
