खनन राजस्व में चतरा-हजारीबाग शीर्ष पर, दुमका-साहिबगंज पिछड़े; झारखंड में जुलाई तक 8,277 करोड़ रुपये हासिल
झारखंड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जुलाई तक खनन राजस्व लक्ष्य का 30.66% (8,277.48 करोड़ रुपये) हासिल किया है, जिसमें चतरा और हजारीबाग का प्रदर्शन बेहतर रहा है।

नए केंद्रीय खनिज अधिनियम से 14,000 करोड़ राजस्व हानि की आशंका।
HighLights
जुलाई तक 27,000 करोड़ के लक्ष्य का 30.66% राजस्व प्राप्त।
चतरा और हजारीबाग ने राजस्व वसूली में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जुलाई 2026 तक के राजस्व संग्रह का जिलावार ब्यौरा जारी किया है। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में जुलाई 2025 तक की वसूली (5,137.37 करोड़ रुपये) से काफी अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 27,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य में से जुलाई तक 8,277.48 करोड़ रुपये की वसूली की है, जो कुल लक्ष्य का 30.66% है।
चतरा और हजारीबाग ने मारी बाजी, कुछ जिले बेहद पिछड़े
राजस्व वसूली के मामले को देखें तो चतरा और हजारीबाग का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। चतरा ने सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपने लक्ष्य का 42.27% (771.16 करोड़ रुपये) वसूली की है, जबकि हजारीबाग ने 40.30% (1,088.47 करोड़ रुपये) वसूली की है।
इसके अलावा लोहरदगा (35.87%), लातेहार (35.43%), पाकुड़ (34.51%) और रामगढ़ (33.74%) ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, कई जिलों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। गढ़वा ने मात्र 4.96% (4.98 करोड़ रुपये), खूंटी ने 5.18% (4.27 करोड़ रुपये), कोडरमा ने 6.54% (4.95 करोड़ रुपये) और सिमडेगा ने 6.72% (3.41 करोड़ रुपये) वसूली की है।
ये आंकड़े इन जिलों में राजस्व संग्रहण में गंभीर चुनौतियों को इंगित करते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, कोडरमा, गढ़वा, सिमडेगा, दुमका और साहिबगंज जैसे जिलों में सेस की वसूली बहुत कम या लगभग शून्य रही है, जिसका कारण पत्थर की खानों की लीज की समय पर नवीनीकरण ना होना बताया जा रहा है।
नए खनिज अधिनियम से राजस्व पर खतरे के बादल
इन आंकड़ों के बीच, हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 2026 में किए गए संशोधन ने झारखंड के लिए चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार को आशंका है कि एमएमडीआर एक्ट में संशोधन के कारण उसे लगभग 14,000 करोड़ रुपये तक का वार्षिक राजस्व नुकसान उठाना पड़ सकता है।
झारखंड सरकार ने 'द झारखंड मिनरल बियरिंग लैंड सेस रूल-2024' के माध्यम से खनिजों और खनन वाली भूमि पर सेस (उपकर) की वसूली शुरू की थी, जिससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7,487.91 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
इसी वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस मद से 13,800 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच लगभग 4,400 करोड़ रुपये की वसूली भी हो चुकी है।
नए कानून को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस विधेयक पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से पुनर्विचार की अपील की है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस अधिनियम को राज्य और देश के हित में बताते हुए इसे समर्थन दिया है और दावा किया है कि इससे अवैध खनन पर रोक लगेगी। विपक्ष का आरोप है कि इस कानून से खनिज संपन्न राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर गंभीर असर पड़ेगा।
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