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'खनिज हमारा, तो फैसला भी हमारा होगा': BJP पर बरसे JMM महासचिव विनोद पांडेय, पूछा- पूंजीपतियों की चिंता क्यों?

Published: Fri, 28 Aug 2026 08:37 AM (IST)

झामुमो ने खनिज संसाधनों पर राज्य द्वारा सेस लगाने के अधिकार को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। महासचिव ...और पढ़ें

विनोद पांडेय (फाइल फोटो)

विनोद पांडेय (फाइल फोटो)

HighLights

  1. झामुमो ने खनिज संसाधनों पर सेस लगाने के अधिकार पर भाजपा को घेरा।

  2. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के खनिज अधिकारों को स्पष्ट रूप से मान्यता दी है।

  3. झारखंड अपने प्राकृतिक संसाधनों पर राजस्व का फैसला खुद करेगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने खनिज संसाधनों पर राज्य द्वारा सेस लगाए जाने के अधिकार को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि भाजपा को अब यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसे झारखंड के हित और संवैधानिक अधिकार से परेशानी है या उन पूंजीपतियों से, जिन पर इस व्यवस्था का आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। 

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने की शक्ति को स्पष्ट रूप से मान्यता दी है। ऐसे में भाजपा द्वारा इस अधिकार पर सवाल उठाना सीधे तौर पर राज्यों के अधिकार और संघीय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश है।

राजस्व का फैसला झारखंड क्यों नहीं करेगा? 

झामुमो महासचिव ने भाजपा नेताओं से तीन सवाल किए कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों के अधिकार को संवैधानिक मान्यता दी है, तो भाजपा को झारखंड द्वारा अपने खनिज पर सेस तय करने से आपत्ति क्यों है? इसी तरह, जब खनिज झारखंड की धरती से निकलता है, उसके पर्यावरणीय और सामाजिक दुष्प्रभाव झारखंड के लोग झेलते हैं, तो उसके ऊपर लगने वाले सेस और राजस्व का फैसला झारखंड क्यों नहीं करेगा? 

यह भी पूछा कि यदि झारखंड का खनिज महंगा लगता है तो कोई उसे खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। यदि भाजपा के पूंजीपति मित्रों को कहीं सस्ता खनिज उपलब्ध होता है तो वे वहां से खरीद सकते हैं। लेकिन झारखंड को अपने प्राकृतिक संसाधन औने-पौने दाम पर देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। 

विनोद पांडेय ने कहा कि अब वही पुरानी मानसिकता स्वीकार नहीं की जाएगी जिसमें “खनिज झारखंड से निकालेंगे, कीमत अपने हिसाब से तय करेंगे और झारखंड अपने हिस्से का सेस लगाए तो उसका विरोध करेंगे।” झारखंड किसी की खनिज संपदा की दुकान नहीं है।

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