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Jharkhand News: होली पर शराब की बिक्री तय करेगी कितनी और दुकानें होंगी सरेंडर, दोबारा होगा रजिस्ट्रेशन

Published: Thu, 05 Mar 2026 06:26 PM (IST)

झारखंड में होली पर शराब की बिक्री तय करेगी कि कितनी और दुकानें सरेंडर होंगी। कुल 1343 में से 1302 ...और पढ़ें

होली पर शराब की बिक्री तय करेगी कितनी और दुकानें होंगी सरेंडर

होली पर शराब की बिक्री तय करेगी कितनी और दुकानें होंगी सरेंडर

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राज्य ब्यूरो, रांची। होली के मौके पर शराब की बिक्री ही तय करेगी कि राज्य में कितनी और दुकानें सरेंडर होंगी। किस दुकान से शराब की कितनी बिक्री हुई, इसका राजस्व पर क्या असर होगा, दुकानदार को कितना नफा व कितना नुकसान हुआ, इन सभी बातों की समीक्षा के बाद ही दुकानदार आगामी वित्तीय वर्ष के प्रस्तावित राजस्व लक्ष्य के 12.5 प्रतिशत मार्जिन मनी को जमा करेंगे। जो दुकानदार मार्जिन मनी जमा नहीं करेंगे, वह दुकान भी एक अप्रैल से स्वत: सरेंडर मानी जाएगी।

आगामी वित्तीय वर्ष के लिए दुकानों के नवीनीकरण को लेकर उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग का सात फरवरी तक लाइसेंस शुल्क जमा करने का निर्देश था। राज्य में कुल 1343 दुकानों में केवल 1302 दुकानों के लिए ही लाइसेंस शुल्क जमा हुआ। यानी 41 दुकानों के संचालन में दुकानदारों ने रूचि नहीं दिखाई। मतलब उतनी दुकानें एक अप्रैल से सरेंडर मानी जाएंगी, जिसके फिर से निबंधन के लिए प्रक्रिया शुरू होनी है।

लाइसेंस शुल्क जमा करने वाले 1302 दुकानदारों को आगामी वित्तीय वर्ष के लिए साढ़े बारह प्रतिशत मार्जिन मनी सात मार्च तक जमा करने का निर्देश है। सूचना है कि कई दुकानदारों ने यह सोंचकर लाइसेंस शुल्क जमा किया, ताकि उनके नाम दुकान आरक्षित हो जाए।

होली के मौके पर अच्छी बिक्री हुई तो वे आगामी वित्तीय वर्ष में अपनी दुकान जारी रखने के लिए मार्जिन मनी जमा करेंगे, नहीं बिक्री होने पर वहीं से वापस हो जाएंगे, मतलब मार्जिन मनी जमा नहीं करेंगे। वे अपने लाइसेंस शुल्क का नुकसान झेल सकते हैं, क्योंकि उक्त राशि नन रिफंडेबल है।

पूर्व में दुकानदार संघ का कहना था कि जिस अनुरूप वे कर की अदायगी कर रहे हैं, उस अनुरूप उन्हें फायदा नहीं हो रहा है, इसलिए वे अपनी दुकानें सरेंडर करने पर विचार कर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में विभाग सात मार्च के बाद सरेंडर होने वाली सभी दुकानों के फिर से निबंधन को लेकर वित्तीय वर्ष 2026-27 का विज्ञापन जारी करेगा और लॉटरी आदि की प्रक्रिया से दुकानों के निबंधन की प्रक्रिया पूरा करेगा। जो दुकानें निबंधित नहीं होंगी, उसे विभाग स्वयं संचालित करेगा।

गौरतलब है कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए शराब दुकानों के नवीनीकरण को लेकर लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि सात फरवरी रखी थी। इसमें नगर निगम क्षेत्र की दुकानों के लिए दो लाख रुपये व ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों के लिए एक लाख रुपये रखा गया था।

यह राशि नॉन रिफंडेबल है। इसका मतलब यह हुआ कि जिन दुकानों का लाइसेंस शुल्क जमा होगा, उन्हें ही अगले वित्तीय वर्ष के लिए नियमित माना जाएगा, जो नहीं देंगे, वह सरेंडर माने जाएंगे। इस नियम के तहत ही कुल 1302 दुकानदारों ने लाइसेंस शुल्क जमा किया था, यानी वे अगले वित्तीय वर्ष में भी उन दुकानों के संचालित करने के लिए तैयार हैं।

गौरतलब है कि राज्य में कुल 1343 दुकानों में देसी शराब की 159 व कंपोजिट शराब की 1184 दुकानें स्वीकृत हैं। एक सितंबर 2025 से ये सभी दुकानें निजी हाथों से संचालित हो रही हैं।