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झारखंड शराब घोटाले की CBI जांच की मांग, BJP नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को सौंपा पत्र

Published: Tue, 31 Mar 2026 03:01 PM (IST)

बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल संतोष गंगवार से मिलकर झारखंड शराब घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने एसीबी ...और पढ़ें

HighLights

  1. बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से सीबीआई जांच की मांग की।

  2. एसीबी पर 750 करोड़ के शराब घोटाले में संरक्षण का आरोप।

  3. चार्जशीट में देरी से मुख्य आरोपियों को मिली जमानत।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को लोकभवन में राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात की और राज्य में हुए शराब घोटाले की जांच सीबीआई से कराने के लिए पत्र सौंपा।

पत्र में राज्य के 750 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले में एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) को तुरंत चार्जशीट दाखिल करने के लिए निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है।

मरांडी ने पत्र में लिखा है कि एसीबी इस गंभीर आर्थिक अपराध की निष्पक्ष जांच करने की बजाय भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है। एसीबी तय समयसीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं कर रही है।

ACB पर बीजेपी के गंभीर आरोप

पत्र में आरोप लगाया गया है कि 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव IAS विनय कुमार चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया था।

21 मई 2025 को झारखंड स्टेट बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड के महाप्रबंधक (वित्त) सुधीर कुमार दास, पूर्व महाप्रबंधक सुधीर कुमार और प्लेसमेंट एजेंसी के नीरज कुमार को गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद अक्टूबर 2025 में महाराष्ट्र और गुजरात से 7 अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन इन गिरफ्तारियों के बाद एसीबी ने भ्रष्टाचारियों को बचाने की साजिश रची। 20 मई को गिरफ्तार किए गए गजेंद्र सिंह को महज 56 दिनों के बाद 15 जुलाई 2025 को जमानत मिल गई थी।

इससे भी अधिक गंभीर बात यह रही कि मुख्य आरोपी IAS विनय चौबे को 19 अगस्त 2025 को न्यायालय से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187(2) के तहत डिफाल्ट बेल मिल गई थी।

विनय चौबे की तरह ही अगले दिन, 20 अगस्त 2025 को सुधीर कुमार दास, सुधीर कुमार और नीरज कुमार को भी न्यायालय से जमानत दे दी गई थी।

बीजेपी नेता ने कहा कि इन सभी रसूखदार आरोपियों को यह जमानत इसलिए मिली, क्योंकि एसीबी ने जानबूझकर 90 दिनों की निर्धारित वैधानिक समय-सीमा के भीतर न्यायालय में उनके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल ही नहीं किया।

राज्यपाल से उनकी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह बाबूलाल मरांडी ने किया है।

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