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पूर्वी भारत में पहली बार: झारखंड में सरकारी स्तर पर शुरू होंगे एविएशन इंजीनियरिंग और एयर होस्टेस कोर्स

Published: Thu, 23 Jul 2026 08:01 AM (IST)Updated: Thu, 23 Jul 2026 04:09 PM (IST)

झारखंड में विमानन अभियंताओं की कमी दूर करने के लिए झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग और एयर होस्टेस ...और पढ़ें

झारखंड के साथ पड़ोसी राज्यों के युवाओं को कोर्स के लिए सुदूर राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। (तस्वीर: एआई जेनरेटेड)

झारखंड के साथ पड़ोसी राज्यों के युवाओं को कोर्स के लिए सुदूर राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। (तस्वीर: एआई जेनरेटेड)

HighLights

  1. झारखंड में एएमई और एयर होस्टेस कोर्स शुरू।

  2. नवंबर में मुख्यमंत्री करेंगे पाठ्यक्रमों का उद्घाटन।

  3. पूर्वी भारत का पहला सरकारी विमानन प्रशिक्षण केंद्र।

राज्य ब्यूरो, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर देश में एविएशन अभियंताओं की कमी को दूर करने की पहल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर झारखंड फ्लाइंग इंस्टीच्यूट ने पहल शुरू कर दी है।

इंस्टीच्यूट ने विमानन अभियंता सह एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (एएमई) कोर्स के संचालन के लिए दिल्ली की संस्था मेसर्स वेन्योर के साथ एमओयू किया है। एयर होस्टेस के प्रशिक्षण के लिए भोपाल के एआइएसईसीटी लिमिटेड के साथ करार हुआ है।

यह राज्य के नागर विमानन के धनबाद स्थित आधारभूत संरचना पर शुरू होगा। दोनों पाठ्यक्रमों की शुरुआत नवंबर में आयोजित स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के हाथों होगा। झारखंड पूर्वी भारत का ऐसा पहला राज्य होगा जहां सरकारी स्तर पर दोनों पाठ्यक्रमों की पढ़ाई होगी।

पड़ोसी राज्यों में सरकारी स्तर पर ऐसे कोर्स उपलब्ध नहीं है। धनबाद में खनन, इंजीनियरिंग संस्थान उपलब्ध है। इसलिए यहां इस संस्थान को शुरू करने का निर्णय सरकार ने लिया है। मेसर्स वेन्योर यह पाठ्यक्रम पीपीपी मोड पर चलायेगा। राज्य सरकार या फ्लाइंग इंस्टीच्यूट पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पडे़गा।

एएमई कोर्स में कुल 60 सीटें उपलब्ध है, जबकि एयर होस्टेस के छह महीने एवं 12 महीने के कोर्स में 60-60 सीटें उपलब्ध रहेंगी। डीजीसीए के अनुमति के बाद पाठ्यक्रमों का संचालन आरंभ कर दिया जायेगा। झारखंड फ्लाइंग इंस्टीच्यूट वेन्योर संस्थान के दोनों पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आधारभूत संरचना उपलब्ध करायेगा। इससे इंस्टीच्यूट को कुछ वित्तीय लाभ भी मिलेगा।

इस संस्थान के आरंभ होने से राज्य और पड़ोसी राज्यों के युवक युवतियों को सरकारी स्तर पर कोर्स करने के लिए दूरवर्ती राज्यों में महंगे खर्च पर नहीं जाना पडे़गा। एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (एएमई) के लिए तीन वर्ष का कोर्स होगा जिसके लिए छह लाख रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। जिसे तीन किस्तों वार्षिक 2-2 लाख रुपये देना होगा।

इसी प्रकार एयर होस्टेस के छह महीने के प्रशिक्षण कोर्स के लिए 1,00,500 रुपये निर्धारित किया गया है। साथ ही 12 महीने के डिप्लोमा कोर्स के लिए 1,55,500 रुपये तय किया गया है। इसमें ड्रेस, ग्रूमिंग किट और स्वीमिंग प्रशिक्षण शामिल है। एयर होस्टेस के लिए फार्म भरने की अंतिम तिथि 30 जुलाई है और फार्म झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के वेब साइट पर उपलब्ध है।

एविएशन इंजीनियरों की कमी और झारखंड के युवक युवतियों को इसका अवसर प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर दोनो पाठ्क्रमों को संचालन जल्द शुरू कर दिया जायेगा। इसकी सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। पूर्वी भारत में सरकारी स्तर पहली बार इस तरह का कोर्स शुरू हो रहा है।
-कैप्टन एसपी सिन्हा, एमडी झारखंड फ्लाइंग इंस्टीच्यूट।

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