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झारखंड में 6 अप्रैल से जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, ओपीडी सेवा रहेगी बाधित

Published: Sun, 29 Mar 2026 08:49 PM (IST)

झारखंड में जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड संशोधन आंदोलन को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड का पूर्ण समर्थन मिला है। अनिश्चितकालीन ...और पढ़ें

6 अप्रैल से हड़ताल पर रहेंगे डॉक्टर। (जागरण)

6 अप्रैल से हड़ताल पर रहेंगे डॉक्टर। (जागरण)

HighLights

  1. IMA झारखंड ने जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को पूर्ण समर्थन दिया।

  2. 6 अप्रैल से रिम्स सहित सभी मेडिकल कॉलेजों में अनिश्चितकालीन हड़ताल।

  3. ओपीडी सेवाएं बाधित रहेंगी, जबकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी।

जागरण संवाददाता, रांची। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड संशोधन को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) झारखंड ने रविवार को आयोजित ऑनलाइन बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए आईएमए जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क (आईएमए जेडीएन) द्वारा 6 अप्रैल से रिम्स सहित सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है।

जिसके बाद ओपीडी सेवा पूरी तरह बाधित रहेगी, जबकि इमरजेंसी सेवाएं बहाल रहेगी। आईएमए के इस निर्णय से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि यदि सरकार समयबद्ध और संतोषजनक समाधान नहीं देती है, तो आंदोलन और तेज होगा। यदि 6 अप्रैल से हड़ताल शुरू होती है, तो राज्य के सभी छह मेडिकल कालेजों और अस्पतालों में सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

ऐसे में मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। मालूम हो कि इस आंदोलन के समर्थन में झासा भी सामने आया है, जिसके बाद सदर अस्पतालों में भी सेवा बाधित हो सकती है।

झासा के महासचिव डॉ. मृत्युंजय सिंह ने बताया कि छह अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने के निर्णय का झासा ने समर्थन किया है। अगर संबंधित अधिकारी समय पर और संतोषजनक तरीके से इन मांगों को पूरा नहीं करते हैं।

झासा अपनी पूर्ण एकता का आश्वासन दिया है और चिकित्सा समुदाय के व्यापक हित में आंदोलन को हर संभव समर्थन देने का वादा किया है।

ऑनलाइन बैठक में बनी सहमति 

रविवार को आईएमए झारखंड की ऑनलाइन बैठक में राज्यभर के पदाधिकारियों और सदस्यों ने भाग लिया। विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सीनियर रेसिडेंट और इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड संशोधन की मांग पूरी तरह जायज है और लंबे समय से लंबित है।

आईएमए ने कहा कि बढ़ती महंगाई, कार्यभार और चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए स्टाइपेंड का समय-समय पर पुनरीक्षण जरूरी है। इस संदर्भ में हर तीन वर्ष में संशोधन का प्रस्ताव व्यावहारिक और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने वाला बताया गया।

फिलहाल ब्लैक बैज से विरोध जारी 

आईएमए जेडीएन के नेतृत्व में राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में हर सोमवार को डॉक्टर ब्लैक बैज पहनकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीका अपनाते हुए सरकार का ध्यान डॉक्टरों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने की कोशिश है।

इस आंदोलन को झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विस एसोसिएशन (जेएसएचएसए) ने भी समर्थन देने की बात कही है। इससे साफ है कि चिकित्सा समुदाय में इस मुद्दे को लेकर व्यापक असंतोष है और सभी संगठन एकजुट होते दिख रहे हैं।

सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग 

आईएमए झारखंड ने स्वास्थ्य मंत्री और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिख इस मामले में संवेदनशीलता के साथ तत्काल निर्णय लेने की अपील की है।

संगठन ने कहा कि यह मुद्दा न केवल डॉक्टरों के अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से भी सीधा संबंध रखता है। आईएमए के समर्थन के बाद जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन अब और मजबूत हो गया है।

अब निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि वह इस बढ़ते दबाव के बीच क्या कदम उठाती है और कैसे स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित होने से बचाती है।

क्या है मुख्य मांग 

  • सीनियर रेसिडेंट और इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड को संशोधित करना
  • बढ़ती महंगाई, कार्यभार और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए स्टाइपेंड का पुनरीक्षण करना
  • संगठन ने हर तीन वर्ष पर स्टाइपेंड संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता और स्थिरता बनी रहे

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