HRMS Portal Dispute: संपत्ति विवरणी जमा करने की सख्ती के खिलाफ उठे सवाल, वित्त मंत्री के दखल के बाद गरमाई सियासत
झारखंड में सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति विवरणी जमा करने के लिए मानव संपदा पोर्टल (एचआरएमएस) की समय-सीमा को लेकर विवाद गहरा गया है।

वरिष्ठ अधिकारियों को छूट और कनिष्ठों पर सख्ती से नाराजगी है, जिस पर वित्त मंत्री ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
HighLights
वरिष्ठ-कनिष्ठ अधिकारियों के लिए अलग-अलग नियम से रोष।
वित्त मंत्री ने मुख्य सचिव से हस्तक्षेप का आग्रह किया।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में सरकारी कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति विवरणी जमा करने को लेकर मानव संपदा पोर्टल (एचआरएमएस) की समय-सीमा विवादों में घिरती जा रही है।
खासकर वरीय अधिकारियों के लिए दी जा रही छूट की सुविधा और इससे कनीय अधिकारियों को वंचित रखने को लेकर चल रही गतिविधियां नाराजगी का बड़ा कारण है।
बड़ी बात यह है कि जब कर्मी अपनी आंखों के सामने इस तरह का बर्ताव देखते हैं तो उनके मन में रोष का भाव उत्पन्न होता है।
सवाल उठता है कि इसी पोर्टल अथवा इसी तरह के अन्य पोर्टल पर सीनियर अफसरों के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं कनीय अधिकारियों की थोड़ी सी चूक के लिए उन्हें परेशान किया जाता है।
मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) के माध्यम से नियुक्ति, स्थानांतरण, प्रोन्नति, वेतन निर्धारण, एमएसीपी, अवकाश, निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे कई प्रशासनिक आदेश आनलाइन जारी किए जा सकते हैं।
इसकी खास बात यह है कि जारी आदेश अपने आप कर्मचारी की ई-सर्विस बुक में दर्ज हो जाते हैं। इस प्रकार उक्त कर्मी को कहीं किसी से आग्रह नहीं करना पड़ता है। हालांकि सभी कार्यों में इसका इस्तेमाल होता दिख नहीं रहा है।
अटक रहे प्रोन्नति के मामले
राज्य में कार्मिक विभाग ने 27 मई 2025 को एक संकल्प जारी करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 से वीसीआइएस (विजिलेंस क्लियरेंस इंफोर्मेशन सिस्टम) के जरिए पदाधिकारियों के लिए निगरानी स्वच्छता प्रमाण-पत्र आनलाइन प्राप्त करने की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया था, ताकि पदोन्नति सहित अन्य सेवा मामलों में अनावश्यक विलंब न हो। लेकिन अब तक यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
अपार में भी बार-बार बढ़ी अवधि
कार्मिक विभाग की वेबसाइट पर झारखंड प्रशासनिक सेवा के (एनुअल परफोर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट) के आनलाइन मूल्यांकन के संबंध में कई वर्षों के आदेश उपलब्ध हैं।
2021, 2022, 2023 और 2024 में भी इसे अपलोड करने तथा मूल्यांकन पूरा करने के लिए अवधि विस्तार किया गया।
2025 में भी 24 अप्रैल, 25 जून और 16 जुलाई को आनलाइन मूल्यांकन संबंधी आदेश जारी हुए। लेकिन, चालू वित्तीय वर्ष में इस पर पाबंदी लगा दी गई है। तिथि बढ़ाने के लिए विभाग तैयार नहीं है।
संपत्ति विवरणी में पहले भी बढ़ी है समय-सीमा
वर्ष 2024 में भी संपत्ति विवरणी की समय-सीमा बढ़ाने के दो आदेश जारी हुए थे। 27 जून 2024 को अंतिम तिथि 31 जुलाई 2024 तक और 20 अगस्त 2024 को पांच सितंबर 2024 तक विवरणी दाखिल करने को लेकर निर्देश दिया गया था।
दोनों आदेश वर्ष 2023 की संपत्ति विवरणी एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से जमा करने से संबंधित थे। ये आदेश दिखाते हैं कि समय-सीमा बढ़ाने की परंपरा पहले से रही है।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर लिख चुके हैं पत्र
वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पोर्टल को हर तीन महीने में सात दिनों के लिए खोलने पर विचार करने का आग्रह किया है।
ताकि निर्धारित अवधि में विवरणी जमा न कर पाने वाले कर्मचारियों को विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त अवसर मिल सके।
यह मामला तब सामने आया जब लगभग तीन सौ पुलिस पदाधिकारियों के संपत्ति विवरणी जमा न कर पाने का मुद्दा उठा।
वित्त मंत्री ने कार्मिक सचिव के व्यवहार से पुलिस पदाधिकारियों की प्रोन्नति प्रभावित होने की आशंका जताते हुए मुख्य सचिव से हस्तक्षेप का अनुरोध भी किया है।
कार्मिक विभाग पर भी कम सवाल नहीं उठ रहे
पोर्टल के रिकार्ड पर नजर डालें तो कार्मिक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। 2016 के बाद नियुक्ति श्रेणी में कोई नियुक्ति आदेश पोर्टल से जारी नहीं दिखता।
2016 में पांचवीं जेपीएससी सिविल सेवा के तहत नियुक्तियों के आदेश एचआरएमएस से जारी हुए थे, लेकिन छठी से तेरहवीं जेपीएससी के तहत हुई नियुक्तियों के आदेश पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं।
इसी तरह स्थानांतरण श्रेणी में 2017 का केवल एक आदेश, मातृत्व अवकाश में एक आदेश और सेवा संपुष्टि में भी सीमित आदेश ही दिखाई देते हैं। वेतनवृद्धि, प्रोन्नति और एमएसीपी जैसे महत्वपूर्ण मामलों में भी पोर्टल पर कोई आदेश उपलब्ध नहीं है।