झारखंड में रद नियुक्तियों पर हाई कोर्ट में आज सुनवाई, JPSC 14वीं मामले में सुप्रीम कोर्ट भी करेगा विचार
झारखंड सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में नियुक्तियों के विज्ञापन रद करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को ...और पढ़ें

विज्ञापन रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई होगी।
HighLights
झारखंड हाई कोर्ट में नियुक्तियां रद्द करने पर सुनवाई आज।
सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द कीं, 6 स्थगित, 17 जांच के दायरे में।
जेपीएससी अनियमितताओं पर सुप्रीम कोर्ट में भी होगी सुनवाई।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापनों को रद करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर झारखंड हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
इन विज्ञापनों के माध्यम से सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। राज्य सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर 22 परीक्षाओं को रद करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का निर्णय लिया था।
सरकार के इस फैसले में ऐसे विज्ञापन भी शामिल हैं, जिनके आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, लेकिन अब तक नियुक्तियां नहीं हुई थीं। सरकार के फैसले के खिलाफ कई अभ्यर्थियों और अन्य प्रार्थियों ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से 20 अगस्त को अदालत से इन मामलों पर शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया गया था। इसके बाद अदालत ने सभी याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तिथि निर्धारित की।
जेपीएससी 14वीं और सीजीएल मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई
जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 और सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में 24 अगस्त को सुनवाई होगी।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है।
याचिका में जेपीएससी की ओर से 19 अप्रैल को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। याचिका में परीक्षा रद कर नए सिरे से परीक्षा कराने तथा पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच कराने का आग्रह किया गया है।
