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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 29, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jharkhand High Court: झारखंड हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी... रिटायर्ड कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहे अधिकारी

By M EkhlaqueEdited By:
Published: Fri, 29 Apr 2022 08:11 PM (IST)Updated: Fri, 29 Apr 2022 08:12 PM (IST)

Jharkhand High Court झारखंड हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के अधिकारियों की कार्यशैली ...और पढ़ें

Jharkhand High Court: झारखंड हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी... रिटायर्ड कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहे अधिकारी
Jharkhand High Court: झारखंड हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी... रिटायर्ड कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहे अधिकारी

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एस चंद्रशेखर की अदालत में सेवानिवृत्ति लाभ के भुगतान को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के अधिकारियों की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि लंबे समय से सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं होना अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य के अधिकारियों का रवैया सेवानिवृत्त कर्मी को प्रताडि़त करने जैसा है।

अदालत बहुत दुख के साथ आदेश में यह रिकार्ड कर रहा है कि सरकार की ओर से 19 बार समय लिया गया। इसके बाद भी गलत शपथ पत्र दाखिल किया। त्वरित न्याय दिलाने के लिए सरकार की स्टेट लिटिगेशन पालिसी है, लेकिन इस नीति के विपरीत कार्य किया गया है। झूठा शपथ पत्र दाखिल कर अदालत को गुमराह किया जाता है। अदालत ने तीन माह में प्रार्थी के बकाया सहित सारे वित्तीय लाभ एसीपी-एमएसीपी का लाभ, फैमिली पेंशन आदि का नए सिरे से गणना करते हुए भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में सुनीता वर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि प्रार्थी के पति पवन कुमार वर्मा सहकारिता विभाग से वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त हुए, लेकिन उन्हें सेवानिवृत्ति का लाभ नहीं मिला। इसके लिए उन्होंने हाई कोर्ट से गुहार लगाई। कोर्ट के निर्देश के बाद कुछ दावे का भुगतान किया गया। इस बीच पवन कुमार वर्मा का निधन हो जाने के बाद उनकी पत्नी सुनीता वर्मा इस मामले में प्रार्थी बनीं। सरकार ने अब तक उनके पेंशन (फैमिली) आदि का निपटारा नहीं किया है। इसके बाद अदालत ने प्रार्थी को सभी प्रकार के बकाया भुगतान का आदेश दिया है।