राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने स्थायी वारंट जारी होने के 15 साल बाद भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस केपी देव की अदालत ने इसे पुलिस की लापरवाही मानते हुए राज्य के गृह सचिव, डीजीपी, जोनल आइजी, डीआइजी, लातेहार एसपी व बरवाडीह थाना प्रभारी व जांच अधिकारी को तलब किया है। 14 सितंबर को सभी को कोर्ट में हाजिर होना है। कोर्ट ने कहा कि इससे पता चलता है कि पुलिस की कार्यवाही कितनी सुस्त है। स्थाई वारंट जारी हुए 15 साल बीत गए, लेकिन अबतक पुलिस वारंट का तामिला भी नहीं कर पा रही है। कोर्ट ने हरि सिंह की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया है।

जानें, क्या है मामला :साल 2003 में लातेहार वनपाल मिथिलेश सिंह अपनी टीम के साथ बेतला पार्क में गश्ती पर निकले थे। धुनिया नामक स्थान पर हथियारों से लैस अपराधियों का वन विभाग की टीम से आमना-सामना हो गया। वन विभाग की टीम द्वारा ललकारने पर अपराधियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी और मौके से फरार हो गए। इस मामले में बरवाडीह थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने इस मामले में हरि सिंह को गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक अन्य आरोपित दशरथ सिंह फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने दशरथ सिंह को फरार घोषित कर अंतिम चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी और स्थायी वारंट प्राप्त कर लिया।

निचली अदालत ने इस मामले में सुनवाई के बाद हरि सिंह को सजा सुनाई। निचली अदालत के फैसले को हरि सिंह ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।हरि सिंह की अपील याचिका पर जस्टिस केपी देव की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में एक अन्य आरोपित दशरथ सिंह अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि स्थायी वारंट के 15 साल बाद भी पुलिस वारंट का तामिला नहीं करा सकी। यह गंभीर मामला है। इसके बाद कोर्ट ने गृह सचिव, डीजीपी सहित अन्य को तलब किया है।

 

Posted By: Sachin Mishra