रांची। Banna Gupta INTERVIEW, Coronavirus in Jharkhand झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का कहना है कि राज्य में कोरोना के यूके स्ट्रेन आने से संक्रमण अचानक तेजी से बढ़ा। राज्य सरकार ने कोरोना से निपटने की पूरी तैयारी कर रखी थी तथा पहली लहर में इसमें सफलता भी प्राप्त की थी। इस लहर में यूके स्ट्रेन के कारण संक्रमण की रफ्तार काफी तेज है, इस कारण राजधानी रांची के अस्पतालों में बेड की कमी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि सरकार इस समस्या से शीघ्र निपटेगी। दैनिक जागरण के राज्‍य ब्‍यूरो सहयोगी नीरज अम्‍बष्‍ठ ने राज्य में कोरोना की वर्तमान स्थिति तथा मरीजों को हो रही परेशानी पर मंत्री से विस्तृत बात की। प्रस्तुत है बातचीत का प्रमुख अंश :

सवाल: राज्य में कोरोना का संक्रमण इतना तेजी से लगातार बढ़ रहा है। इसके लिए सरकार पहले से तैयार नहीं दिख नहीं थी। क्या सरकार को इस संक्रमण का अनुमान नहीं था?

जवाब : राज्य में वर्तमान में कोरोना के संक्रमण तेजी से बढ़ने का प्रमुख कारण यूके स्ट्रेन का मिलना है। इसमें संक्रमण बढ़ने की क्षमता 70 फीसद अधिक होती है। जहां तक अनुमान की बात है तो कोई इसका कोई अनुमान नहीं लगा सकता। हम कोई भविष्यवक्ता तो नहीं हैं। आखिर हमारे पास जादू की छड़ी तो नहीं है।

सवाल: रांची में मरीज बेड के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ रहे हैं। वेंटिलेटर के बिना मौत हो जा रही है।

जवाब : इस समस्या से निपटने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। रिम्स में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए बेड लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। 110 वेंटेलेटर बेड, 280 ऑक्सीजन बेड, 180 नार्मल बेड बढ़ाए जा रहे हैं। रिम्स को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच बढ़ाने के लिए चार आरटी-पीसीआर मशीन क्रय करने की मंजूरी दे दी है। यूके स्ट्रेन में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन बढ़ाने की अधिक जरूरत पड़ती है। सरकार इस क्षमता को लगातार बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

सवाल: जिस तरह लगातार संक्रमण बढ़ रहा है, उससे शीघ्र ही अन्य जिलों में भी बेड एवं ऑक्सीजन की समस्या होने की पूरी संभावना दिख रही है। क्या ऐसा आपको नहीं लगता?

जवाब : हम लगातार उपायुक्तों से संपर्क में हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मैंने उपायुक्तों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग कर उन्हें बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन आदि बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हम लगातार सिविल सर्जनों को भी निर्देश दे रहे हैं।

सवाल: वेंटिलेटर जिलों में खरीदे गए, लेकिन शो-पीस बने हुए हैं। अब वहां से रांची मंगाए जा रहे हैं। क्या इसमें आपको लापरवाही नहीं दिख रही है?

जवाब : ऐसा नहीं है। मरीजों के इलाज के लिए व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर वेंटिलेटर खरीदे गए। क्या किसी चीज की कोशिश करना गलत है। वेंटिलेटर चलाने के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। जिस हिसाब से जिलों में भी मरीज बढ़ रहे हैं, उससे वहां भी वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ेगी। जहां तक जिलों से वेंटिलेटर रांची मंगाने की बात है तो रांची की आवश्यकता को देखते हुए मंगाए जा रहे हैं। रिम्स में भी बैठक कर 300 और वेंटिलेटर मंगाने के निर्देश दिए गए हैं।

सवाल: दूसरी लहर में जिस तरह लोगों को परेशानी हो रही है, उससे लगता है कि स्वास्थ्य विभाग आनेवाली समस्या को लेकर सजग और तैयार नहीं था। पहली लहर थमने के बाद कोरोना नियंत्रण में सुस्ती पड़ गई थी।

जवाब : ऐसा नहीं है। कोरोना से नियंत्रण को लेकर लगातार प्रयास हो रहे थे। इस संक्रमण में कई विकसित राज्य परेशान हैं, जबकि उनके पास स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ हैं। स्वास्थ्य में ब्रिटेन को सबसे विकसित माना जाता है लेकिन देखिए कि वहां क्या स्थिति हुई। जहां तक बेड की बात है तो रोज तीन हजार से अधिक लोग संक्रमित मिल रहे हैं। इसी कारण यह समस्या हो रही है।

सवाल: राज्य में दवा एवं अन्य मेडिकल उपकरणों की कालाबाजारी की भी बातें सामने आ रही हैं। लेकिन अभी तक एक भी दवा दुकानदार पर कार्रवाई नहीं हुई।

जवाब : कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार सख्त है। जो भी इसमें लिप्त होगा हम उसे नहीं छोड़ेंगे। सभी ड्रग इंस्पेक्टरों व औषधि प्रशासन के लोगों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। ऐसा है तो मुझे जानकारी दें तो मैं खुद निरीक्षण कर कार्रवाई करूंगा।

सवाल: स्थितियां कबतक सुधरेंगी, जनता क्या उम्मीद करे।

जवाब : जहां तक संक्रमण रूकने की बात है तो इसे रोकने के लिए सभी को अपना-अपना प्रयास करना होगा। संक्रमण कब थमेगा इसे लेकर कोई आश्वासन नहीं दिया जा सकता। हमारी प्राथमिकता है लोगों की जान-माल बचाना। हम अपना काम कर रहे हैं। प्रयास का सुखद परिणाम मिलेगा।

झारखंड हाई कोर्ट ने कहा, दवाएं ज्यादा दाम में बेचेंगे तो बर्दाश्‍त नहीं करेंगे...

झारखंड हाई कोर्ट में कोरोना संक्रमितों को दी जाने वाली दवाएं डॉक्सीसाइक्लिन, रेमेडिसिविर, फैवीपिरावीर नहीं उपलब्ध होने के मामले में सुनवाई हुई। तीस हजार में रेमेडिसिविर इंजेक्शन बेचे जाने की खबर पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ड्रग्स कंट्रोलर और ड्रग्स इंस्पेक्टर अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य में दवाओं का जानबूझकर अभाव किया गया है। अदालत किसी भी कीमत में कालाबाजारी को बर्दाश्त नहीं करेगी। आम लोगों को जरूरी दवा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले का विस्तृत आदेश बाद में पारित किया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार अपनी दायित्वों का निर्वहन करते हुए आम लोगों को दवाएं उपलब्ध कराए। अदालत कोरोना संकट के निपटने को लेकर दर्ज स्वत: मामले में सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान आनलाइन मौजूद ड्रग कंट्रोलर से जब अदालत ने पूछा कि दवाओं की किल्लत क्यों है, तो वह संतोषजनक जवाब नही दे सकीं। उन्होंने अदालत को बताया कि मांग बढ़ जाने से दवाओं की कमी हो गई है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि दवाओं का पूरा ब्योरा आपके पास होता है। आप क्या कर रही हैं। अपने दायित्व का सही तरीके से निर्वहन करें। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि केंद्र सरकार रेमेडिसिविर और अन्य दवाओं का राशनिंग कर रही है। इस कारण सीमित दवाएं आ रही हैं। केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने इसका विरोध किया और कहा कि केंद्र सरकार किसी भी दवा की राशनिंग नहीं कर रही है। राज्य सरकार अदालत को गलत जानकारी दे रही है। 

सीएम की बैठक में होने के कारण स्वास्थ्य सचिव नहीं हुए हाजिर

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव को भी हाजिर होने का निर्देश दिया था, लेकिन वे सुनवाई के दौरान अनुपस्थित थे। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वर्तमान स्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बैठक बुलाई है, इस कारण वे कोर्ट में नही आ सके हैं। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि सचिव कोर्ट के आदेश को हल्के में ले रहे हैं। इस मानसिकता को बदलनी होगी। सरकार की ओर से बताया गया कि रिम्स की जीबी में जो भी प्रस्ताव आए थे सभी को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। सीटी स्कैन मशीन की खरीद का आदेश दे दिया गया है। 90 दिनों के अंदर मशीन इंस्टॉल हो जाएगी। कई और मशीनों को खरीदने का ऑर्डर दिया गया है। तकनीशियनों की नियुक्ति के लिए ऑनलाइन इंटरव्यू भी शुरू कर दिया गया है।

पीपीपी मोड पर आइसोलेशन सेंटर बनाने पर जवाब मांगा

हाई कोर्ट ने एक हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से पीपीपी मोड पर आइसोलेशन सेंटर बनाने पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। हस्तक्षेप याचिका में कहा गया था कि अपार्टमेंटों और भवनों में रहने वाले बड़ी संख्या में लोग कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। राज्य सरकार को पीपीपी मोड पर आइसोलेशन सेंटर बनाना चाहिए, ताकि इन लोगों को आइसोलेशन सेंटर में रखा जा सकें।

हाई कोर्ट के स्वास्थ्य केंद्र को कोविड अस्पताल बनाने पर सुनवाई

एडवोकेट एसोसिएशन के महासचिव नवीन कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। एसोसिएशन ने याचिका दाखिल कर कोरोना से संक्रमित हो रहे वकीलों और उनके लिपिकों और उनके परिवार के सदस्यों के बेहतर इलाज के लिए हाई कोर्ट के स्वास्थ्य केंद्र को 30 बेड वाले कोविड अस्पताल बनाने का आग्रह किया है ।

याचिका में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण के दौरान एसोसिएशन के सदस्य सभी एहतियात बरत रहे है। मौजूदा स्थिति में संक्रमण तेजी से फैल रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। राज्य के अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था भी चरमरा गई है। ऐसे में हाई कोर्ट के वकीलों और इनके परिजनों के लिए हाई कोर्ट परिसर में स्थित स्वास्थ्य केंद्र को 30 बेड वाले कोविड अस्पताल में बदलने का निर्देश दिया जाए। यहां ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड, जरूरी दवाएं, एंबुलेंस, मेडिकल स्टॉफ और अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है, ताकि तत्काल इलाज मिल सके।

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