झारखंड हाई कोर्ट का अहम फैसला, दुष्कर्म के प्रयास के लिए स्पष्ट कृत्य जरूरी, साड़ी उठाना पर्याप्त नहीं
झारखंड हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रात में महिला के कपड़े उठाना और उसे पकड़ना दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं है, जब तक कि स्पष्ट कृत्य न हो।

झारखंड हाई कोर्ट। ( प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
महिला के कपड़े उठाना दुष्कर्म का प्रयास नहीं: हाई कोर्ट।
दुष्कर्म प्रयास की धारा 376/511 से 354 में बदला।
आरोपी की सजा जेल में बिताई अवधि तक सीमित।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस पीके श्रीवास्तव की अदालत ने एक आपराधिक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि रात में किसी महिला के घर में घुसकर उसके कपड़े उठाना और उसे पकड़ लेना अपने आप में दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं है। दुष्कर्म के प्रयास के लिए आरोपित की ओर से ऐसा स्पष्ट कृत्य होना चाहिए, जो दुष्कर्म करने की दिशा में पर्याप्त रूप से आगे बढ़ चुका हो।
अदालत ने आरोपित की दुष्कर्म करने के प्रयास की धारा 376/511 के तहत दोषसिद्धि को बदलकर महिला की लज्जा भंग करने धारा 354 में कर दिया। घर में घुसने के मामले में धारा 452 के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखा। निचली अदालत के फैसला के खिलाफ आरोपित की ओर से हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी।
आरोपित को घाटशिला के अपर सत्र न्यायाधीश ने 28 जुलाई 2006 में धारा 376/511 के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। मामला 27 दिसंबर 1999 की रात का है। अभियोजन के अनुसार, पीड़िता अपने घर में सो रही थी। उसकी मां पास के कमरे में सोई थी।
रात करीब 12 बजे दरवाजा खुलने की आवाज सुनकर पीड़िता की नींद खुली। उसने देखा कि आरोपित कमरे में घुस आया है। आरोप था कि आरोपित ने उसके कपड़े उठाए और उसे पकड़ लिया तथा दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता के शोर मचाने पर उसकी मां और आसपास के लोग वहां पहुंचे। इसके बाद आरोपित मौके से भाग गया।
घटना को लेकर चाकुलिया थाने में धारा 376/511 और 452 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के बाद पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया। ट्रायल कोर्ट में अभियोजन की ओर से 10 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। आरोपित ने घटना से इन्कार करते हुए राजनीतिक रंजिश के कारण झूठा फंसाने का दावा किया था।
हाई कोर्ट ने साक्ष्य की समीक्षा करते हुए कहा कि पीड़िता के बयान में आरोपित के कमरे में घुसने और उसे पकड़ने की बात है, लेकिन दुष्कर्म करने की दिशा में उसके किसी विशिष्ट कृत्य का स्पष्ट प्रमाण नहीं है। अदालत ने कहा कि केवल परिस्थितियों या आरोपित की मंशा के आधार पर धारा 376/511 का अपराध नहीं बनता। इसके लिए दुष्कर्म की कोशिश की दिशा में स्पष्ट और निकटवर्ती कृत्य साबित होना जरूरी है।
हालांकि, अदालत ने माना कि आरोपित ने पीड़िता पर हमला किया और उसका कृत्य स्त्री लज्जा भंग करने के आशय से था। इसलिए धारा 354 के तहत अपराध साबित होता है। अदालत ने इसी आधार पर धारा 376/511 की दोषसिद्धि को धारा 354 में बदल दिया।
अदालत ने सजा के दौरान यह भी ध्यान में रखा कि आरोपित का यह पहला अपराध था और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकार्ड नहीं था। घटना को 26 साल से अधिक समय बीत चुका है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उसे अब तक भुगती गई सजा तक सीमित कर दिया। आरोपित ने मुकदमे के दौरान करीब आठ माह जेल में बिताए थे।
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