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झारखंड हाई कोर्ट का अहम फैसला, राजस्व अधिकारी नहीं रद कर सकते वर्षों पुरानी जमाबंदी

Published: Fri, 17 Jul 2026 06:59 AM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि राजस्व अधिकारी वर्षों पुरानी जमाबंदी को रद नहीं कर सकते, यह केवल सक्षम सिविल कोर्ट के आदेश से ही संभव है।

झारखंड हाई कोर्ट।

झारखंड हाई कोर्ट।

HighLights

  1. राजस्व अधिकारी पुरानी जमाबंदी रद नहीं कर सकते।

  2. केवल सक्षम सिविल कोर्ट ही जमाबंदी समाप्त कर सकता है।

  3. जमाबंदी चालू होने पर लगान स्वीकार करना अनिवार्य है।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति के नाम पर वर्षों पहले खुली जमाबंदी (म्यूटेशन) को राजस्व अधिकारी रद नहीं कर सकते।

ऐसी जमाबंदी केवल सक्षम सिविल कोर्ट के आदेश से ही समाप्त की जा सकती है। अदालत ने कहा कि जमाबंदी चल रही हो तो राजस्व अधिकारियों का दायित्व है कि वे लगान स्वीकार करें और रसीद जारी करें।

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने हजारीबाग जिले के 24.79 एकड़ जमीन से संबंधित विवाद की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही जमाबंदी को राजस्व विभाग का कोई अधिकारी रद नहीं कर सकता। यदि किसी को उस जमाबंदी पर आपत्ति है तो उसे सक्षम सिविल अदालत में मुकदमा दायर करना होगा।

मामला हजारीबाग के दारू अंचल स्थित काबिलासी गांव की 24.79 एकड़ भूमि से जुड़ा है। अपीलकर्ताओं का दावा था कि यह जमीन उनके पूर्वजों को करीब 90 वर्ष पहले मिली थी।

आरोप था कि वर्ष 2015 में बिना उन्हें सुनवाई का अवसर दिए दूसरे पक्ष के नाम पर लगान रसीद जारी कर दी गई। सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष ने अदालत को बताया कि संबंधित भूमि की जमाबंदी वर्ष 1964-65 में ही उनके पक्ष में खोल दी गई थी और वर्ष 1965 से 1977 तक नियमित रूप से लगान रसीद भी जारी होती रही।

वर्ष 2015 में केवल पूर्व से चली आ रही उसी जमाबंदी के आधार पर आगे की लगान रसीद जारी की गई थी, कोई नई जमाबंदी नहीं खोली गई।

हाई कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि बिहार टेनेंट्स होल्डिंग्स अधिनियम, 1973 में राजस्व अधिकारियों को जमाबंदी रद करने का अधिकार नहीं दिया गया है।

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