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पुलिस कस्टडी में 500 मौतें पर सुनवाई पूरी: हाई कोर्ट तय करेगा क्या झारखंड सरकार ने मानवाधिकार नियमों का किया पालन?

Published: Thu, 07 May 2026 04:14 PM (GMT+05:30)

झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस हिरासत और जेल में हुई मौतों से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला ...और पढ़ें

पुलिस हिरासत में मौत मामले पर झारखंड हाई कोर्ट का निर्णय सुरक्षित।

पुलिस हिरासत में मौत मामले पर झारखंड हाई कोर्ट का निर्णय सुरक्षित।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने हिरासत में मौत पर फैसला सुरक्षित रखा।

  2. 500 मौतों में से आधी की न्यायिक जांच नहीं हुई।

  3. मानवाधिकार आयोग के दिशानिर्देशों पर सवाल उठाए।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट में राज्य में पुलिस हिरासत और जेल में हुई मौत की घटनाओं को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जारी दिशा-निर्देश के अलावा बीएनएसएस का 196 सब सेक्शन (2) को अदालत में दाखिल किया गया है।

मामले में पूर्व में गृह सचिव ने एक शपथ पत्र दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि पुलिस और जेल कस्टडी में वर्ष 2018 से 2025 के बीच करीब 500 लोगों की मौत हुई है, इनमें से करीब आधे की न्यायिक जांच नहीं हुई है।

अदालत ने गृह सचिव से स्पष्ट रूप से यह पूछा था कि राज्य में हुई हिरासत में मौत की घटनाओं में न्यायिक जांच कराई गई है या नहीं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि शपथ पत्र में बताया जाए कि न्यायिक जांच के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया या नहीं।

सरकार की ओर से पूर्व की सुनवाई में अदालत को यह बताया गया था कि हिरासत में मौत के सभी मामलों की सूचना मजिस्ट्रेट को दी गई थी। जिस पर खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा था कि रिकाॅर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह पता चले कि मजिस्ट्रेट द्वारा जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले में कोई जांच की गई थी या नहीं।

बता दें कि प्रार्थी मुमताज अंसारी ने अदालत से राज्य में जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत मामलों की जांच करने का आदेश देने का आग्रह किया है।

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