रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड हाई कोर्ट ने नियोजन नीति के तहत जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। बुधवार को मामले की सुनवाई लार्जर बेंच में हुई। सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सरकार ने नियोजन नीति के तहत 13 अनुसूचित जिलों के तृतीय और चतुर्थ वर्गीय पदों पर स्थानीय लोगों की नियुक्ति का प्रावधान किया है। सोनी कुमारी ने इसको चुनौती दी है।

इससे पूर्व मंगलवार को अदालत में सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता अजीत कुमार ने कहा था कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्यपाल को इस तरह की अधिसूचना निर्गत करने का पूर्ण अधिकार है। राज्यपाल एवं राज्य सरकार को ऐसा घोषित करने का पूर्ण अधिकार है कि अधिसूचित क्षेत्रों में कौन सा प्रावधान/अधिनियम/ नियम लागू किया जाए अथवा नहीं।

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि संविधान की अनुसूची पांच के पारा 5 (1) और 5 (2) में राज्यपाल को इस तरह की अधिसूचना जारी करने का अधिकार है। अनुसूची पांच के पारा 6 के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा घोषित किए गए अनुसूचित क्षेत्र, जो विभिन्न जिलों के रूप में अधिसूचित किए गए हैैं, उन्हें स्वयं ही जिलावार भगौलिक क्षेत्र का दर्जा दिया गया।

अधिसूचित क्षेत्र अथवा संबंधित जिलों की स्थानीय जनता के उत्थान के लिए जारी की गई अधिसूचना पूरी तरह से नियम संगत है। संविधान की धारा 244 (1) के प्रावधानों के तहत अनुसूचित क्षेत्र के लिए लागू किया जाने वाला कानून संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत निर्धारित होता है। राज्यपाल एवं राज्य सरकार को ऐसा घोषित करने का पूर्ण अधिकार है कि अधिसूचित क्षेत्रों में कौन सा प्रावधान/अधिनियम/नियम लागू किया जाए अथवा नहीं।

राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित जिलों में रहने वाले राज्य के स्थानीय निवासियों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान को ध्यान में रखते हुए उक्त अधिसूचना जारी की गई है। इसके तहत अधिसूचित क्षेत्र अथवा जिले के स्थानीय निवासियों के लिए तृतीय एवं चतुर्थवर्गीय पदों के लिए पूरा आरक्षण दिया जाना कानून सम्मत है। 

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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