Physics Wallah कोचिंग मामला: बिना आदेश पास किए परिसर किया था सील, हाई कोर्ट ने रांची नगर निगम को लगाई फटकार
झारखंड हाई कोर्ट ने रांची नगर निगम द्वारा फिजिक्स वाला कोचिंग संस्थान के परिसर को सील करने की कार्रवाई को अनुचित करार दिया है।

झारखंड हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
निगम द्वारा फिजिक्स वाला परिसर सील करना अनुचित ठहराया।
अदालत ने संचालक को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया।
निगम को सुनवाई कर कारणयुक्त निर्णय लेने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने रांची के लालपुर स्थित प्रनामी हाइट्स में संचालित फिजिक्स वाला कोचिंग संस्थान के परिसर को शो-काज नोटिस के जवाब पर कोई आदेश पारित किए बिना सील करने की रांची नगर निगम की कार्रवाई को अनुचित करार दिया है।
अदालत ने कहा कि जब सक्षम प्राधिकारी ने शो-काज नोटिस जारी किया और उसका जवाब भी प्राप्त कर लिया, तो उस जवाब पर विचार कर कारणयुक्त आदेश पारित किया जाना चाहिए था। सीधे परिसर सील करना उचित प्रक्रिया नहीं है।
अदालत ने परिसर के संचालक अभिषेक नरसरिया को एक और अवसर देते हुए दो सप्ताह के भीतर रांची नगर निगम के प्रशासक के समक्ष विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जवाब प्राप्त होने के बाद प्रशासक को याचिकाकर्ता अथवा उसके प्रतिनिधि को सुनवाई का अवसर देना होगा। इसके बाद परिसर से संबंधित तथ्यों की जांच कर तीन सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार कारणयुक्त निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।
सात दिन में कमियां दूर करने का दिया था निर्देश
मामले में याचिकाकर्ता ने रांची नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त की ओर से एक जुलाई को जारी नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। नोटिस में कोचिंग संस्थान के परिसर में पांच कमियां बताई गई थीं।
नगर निगम ने इन कमियों को सात दिनों के भीतर दूर करने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं करने पर झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 और झारखंड बिल्डिंग बायलॉज, 2016 के तहत परिसर को सील करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद छह जुलाई को भी दूसरा नोटिस जारी किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों नोटिस का जवाब आठ और नौ जुलाई को नगर निगम को दे दिया गया था। इसके बावजूद नगर निगम ने जवाब पर कोई आदेश पारित नहीं किया और तीन सितंबर को परिसर को सील कर दिया।
निगम ने जवाब को बताया था असंतोषजनक
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं थे। नोटिस में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि निर्धारित कमियां दूर नहीं करने पर परिसर को सील किया जा सकता है।
मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि नोटिस जारी करने और उसका जवाब प्राप्त होने के बाद सक्षम प्राधिकारी के लिए जरूरी था कि वह जवाब पर विचार करता और उसके आधार पर उचित आदेश पारित करता।
अदालत ने कहा कि प्रशासनिक निष्पक्षता के सिद्धांत के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण से उचित और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करने की अपेक्षा की जाती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का जवाब स्वीकार नहीं किया जाता है तो उसे अस्वीकार करने के कारण संबंधित आदेश में दर्ज किए जाने चाहिए। बिना कोई आदेश पारित किए सीधे परिसर को सील कर देना उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। इसके साथही अदालत ने याचिका निष्पादित कर दी।
