रांची, जागरण स्‍पेशल। छठी जेपीएससी मेंस परीक्षा पर झारखंड हाई कोर्ट के बड़े फैसले के बाद 28531 अभ्‍यर्थियों के भविष्‍य पर संकट छा गया है। उच्‍च न्‍यायालय ने पीटी में पास सिर्फ 6103 अभ्‍यर्थियों को मेंस के लिए उपयुक्‍त मानते हुए उन्‍हें ही अंतिम परिणाम में शामिल करने का आदेश दिया है। ऐसे में इन छात्रों के लिए आगे का रास्‍ता भी बंद हो गया है। कई छात्रों की तो आयुसीमा भी योग्‍यता-अहर्ता से ज्‍यादा हो चुकी है। हालांकि, सरकार ने अपनी याचिका खारिज होने के बाद अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। अब सर्वोच्‍च न्‍यायालय से अपने हक में फैसला आने का इंतजार इन अभ्‍यर्थियों को करना होगा।

बताया गया है कि झारखंड लोक सेवा आयोग ने छठी जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्‍ट 11 अगस्‍त 2017 को जारी किया था। तब 6103 अभ्‍यर्थियों को सफल घोषित किया गया था। बाद में सरकार के आदेश और संकल्‍प पर जेपीएससी के विज्ञापन में बदलाव किया गया। जिसमें न्‍यूनतम अहर्ता में भी परिवर्तन किया गया, ऐसे में एक साल बाद 6 अगस्‍त 2018 को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित कर कुल 34634 अभ्‍यर्थी उत्‍तीर्ण घोषित किए गए।

कठघरे में जेपीएससी की कार्यप्रणाली

सोमवार को हाई कोर्ट ने जेपीएससी छठी मेंस परीक्षा के परिणाम से जुड़े इस अहम मामले में फैसला सुनाते हुए सरकार के 12 फरवरी 2018 के संकल्‍प को खारिज कर दिया है। ऐसे में न्‍यूनतम अहर्ता में बदलाव कर जिन छात्रों को सफल घोषित किया गया था, अब उनकी प्रतिभा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जेपीएससी की कार्यप्रणाली भी एकबार फिर से कठघरे में खड़ी हो गई।

सरकार का संकल्‍प खारिज, अब सुप्रीम कोर्ट से गुहार

जेपीएससी छठी मेंस परीक्षा के परिणाम पर रोक को चुनौती देने वाली याचिका पर संकल्‍प खारिज होने के बाद अब सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है। ऐसे में सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का मन बनाया है। सोमवार को काफी गहमागहमी के बीच झारखंड उच्‍च न्‍यायालय ने अपना अहम फैसला सुनाया और छठी जेपीएससी मामले में सरकार के विज्ञापन की शर्तों में किए गए बदलाव को सिरे से खारिज कर दिया।

इस मामले में झारखंड सरकार का तर्क है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए संकल्‍प जारी किया गया था, इस तरह के मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है। अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी होंगी। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार को इस मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय से राहत की खबर मिल सकती है।

Posted By: Alok Shahi

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