झारखंड टीचर नियुक्ति मामला: 555 दिनों की देरी पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, अभ्यर्थी की समीक्षा याचिका खारिज
झारखंड हाई कोर्ट ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली नागेंद्र नाथ परिहारी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है।

झारखंड हाई कोर्ट। (जागरण)
HighLights
शिक्षक नियुक्ति पुनरीक्षण याचिका झारखंड हाई कोर्ट ने खारिज की।
याचिका 555 दिनों की देरी से दायर हुई, पर्याप्त कारण नहीं।
कम अंक वालों की नियुक्ति का दावा सबूतों के बिना।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोकन और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी नागेंद्र नाथ परिहारी की पुनरीक्षण की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है।
खंडपीठ ने 555 दिनों की देरी माफ करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि देरी के लिए पर्याप्त कारण नहीं बताया गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने का दावा भी याचिकाकर्ता दस्तावेजों के साथ साबित नहीं कर सके।
मामले में याचिकाकर्ता ने एकल पीठ के आठ जनवरी 2024 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। खंडपीठ ने 23 अप्रैल 2024 को अपील खारिज कर दी थी।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की, जिसे 14 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया गया। इसके करीब 16 महीने बाद 17 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल की गई।
नहीं पेश किया दस्तावेज
अदालत ने कहा कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति के दावे के समर्थन में न तो कोई दस्तावेज पेश किया गया और न ही यह बताया गया कि याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी कब मिली।
सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से बताया गया कि पहले जिला स्तर पर चयन किया जाता था। अदालत ने चयन की उस पद्धति को निरस्त किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
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